शाकाहारी डाइट से फौलादी ताकत: वन रक्षक जितेंद्र कुमार साहू ने जीता नेशनल गोल्ड, जापान वर्ल्ड चैंपियनशिप आर्मरेसलिंग (पंजा कुश्ती) में करेंगे देश व छत्तीसगढ़ का प्रतिनिधित्व

गरियाबंद: उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व (Udanti Sitanadi Tiger Reserve) जिला वन विभाग में वन रक्षक (Forest Guard) के पद पर कार्यरत खिलाड़ी जितेंद्र कुमार साहू ने एक बार फिर पूरे देश और छत्तीसगढ़ राज्य का नाम रोशन किया है। जितेंद्र ने हाल ही में बेंगलुरु (कर्नाटक) में आयोजित ‘6वीं बीसीएआई आर्मरेसलिंग नेशनल चैंपियनशिप 2026’ (6th BCAI Armwrestling National Championship 2026) में छत्तीसगढ़ राज्य का प्रतिनिधित्व करते हुए ‘पंजा कुश्ती’ में ऐतिहासिक सफलता हासिल की है।
बोर्ड ऑफ कंट्रोल फॉर आर्मरेसलिंग इन इंडिया (BCAI) द्वारा आयोजित इस राष्ट्रीय प्रतियोगिता में वन रक्षक जितेंद्र कुमार साहू ने ‘फिजिकल इम्पेयरमेंट स्टैंडिंग’ (Physical Impairment Standing – 95KG+ R.H.) कैटेगरी में देश के दिग्गज खिलाड़ियों को धूल चटाते हुए गोल्ड मेडल (प्रथम स्थान) पर कब्जा किया है। इस शानदार जीत के साथ ही जितेंद्र का चयन अब जापान में होने वाली आधिकारिक ‘वर्ल्ड आर्मरेसलिंग चैंपियनशिप’ (World Armwrestling Championship) के लिए हो गया है, जहां वे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत और छत्तीसगढ़ का प्रतिनिधित्व करेंगे।
आज उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व कार्यालय पहुंचने पर उप-निदेशक (Deputy Director) श्री वरुण जैन (IFS) और SDO श्री दर्रो जी ने जितेंद्र कुमार साहू की इस अभूतपूर्व उपलब्धि पर अत्यंत हर्ष व्यक्त किया, उन्हें बधाई दी और जापान जाने की प्रशासनिक अनुमति (Approval) सहर्ष प्रदान की। अधिकारियों ने कहा कि जितेंद्र की यह सफलता पूरे वन विभाग और गरियाबंद जिले के लिए अत्यंत गर्व का विषय है।
शुद्ध शाकाहारी (Vegetarian) डाइट से पाई फौलादी ताकत:
आमतौर पर माना जाता है कि पंजा कुश्ती (आर्मरेसलिंग) जैसे भारी ताकत वाले खेल के लिए नॉन-वेज डाइट जरूरी है, लेकिन जितेंद्र कुमार साहू ने इस मिथक को पूरी तरह तोड़ दिया है। जितेंद्र पूरी तरह से शुद्ध शाकाहारी (Veg Diet) हैं। उन्होंने बताया कि इस खेल के लिए अत्यधिक न्यूट्रिशन और फौलादी ताकत की जरूरत होती है, जिसे उन्होंने बिना मांस-मछली के, सिर्फ अनुशासित शाकाहारी खान-पान, दालें, दूध-दूध से बने उत्पाद और कड़े अभ्यास के दम पर हासिल किया है। उनकी यह सफलता देश के शाकाहारी युवाओं के लिए एक बड़ी प्रेरणा है।
सफलता का श्रेय:
अपनी इस ऐतिहासिक सफलता पर भावुक होते हुए वन रक्षक जितेंद्र कुमार साहू ने कहा, “मेरी इस जीत और गोल्ड मेडल का पूरा श्रेय मेरी पूजनीय माता जी, मेरे पिता जी , मेरे पूरे परिवार, और मेरे विभाग के मुखिया उप-निदेशक श्री वरुण जैन सर को जाता है। इन सभी के लगातार सहयोग, मार्गदर्शन और आशीर्वाद के बिना मेरा यहाँ तक पहुँचना और देश के लिए गोल्ड जीतना मुमकिन नहीं था।”
जापान प्रवास के लिए छत्तीसगढ़ शासन से प्रोत्साहन की उम्मीद:
विश्व चैंपियनशिप के नियमों के अनुसार, जापान में होने वाली इस अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए खिलाड़ी का प्रारंभिक खर्च लगभग ₹2 लाख (टूर्नामेंट फीस, फ्लाइट और रुकने का व्यय) आ रहा है। एक मध्यमवर्गीय परिवार से आने वाले और वन विभाग में सेवाएं दे रहे जितेंद्र कुमार साहू को उम्मीद है कि छत्तीसगढ़ शासन, खेल मंत्रालय और जिला प्रशासन की ओर से उन्हें उचित खेल प्रोत्साहन और वित्तीय सहयोग मिलेगा, ताकि वे बिना किसी आर्थिक चिंता के जापान की धरती पर तिरंगा लहरा सकें और देश
