30 साल से लंबित वेतन विसंगति दूर करने पर्यवेक्षक संघ ने उठाई आवाज-ऑनलाइन कार्य बंद करने की तैयारी के साथ दी आंदोलन की चेतावनी
आरंग।छत्तीसगढ़ महिला एवं बाल विकास विभाग में कार्यरत पर्यवेक्षकों की लंबित वेतन विसंगति, ग्रेड-पे सुधार, क्रमोन्नत वेतनमान और पदोन्नति सहित अन्य मांगों को लेकर छत्तीसगढ़ महिला एवं बाल विकास पर्यवेक्षक संघ ने फिर आवाज बुलंद की है। संघ की प्रांताध्यक्ष ऋतु परिहार ने संचालनालय महिला एवं बाल विकास विभाग, अटल नगर, नवा रायपुर को पत्र लिखकर मांगों का शीघ्र निराकरण करने की मांग की है। संघ ने चेतावनी दी है कि एक माह के भीतर मांगें पूरी नहीं होने पर एकदिवसीय और इसके बाद अनिश्चितकालीन हड़ताल की जा सकती है।प्रांताध्यक्ष ऋतु परिहार ने पत्र में उल्लेख किया है कि पर्यवेक्षक संघ पिछले 30 वर्षों से वेतन विसंगति, ग्रेड-पे सुधार, क्रमोन्नत वेतनमान और पदोन्नति जैसी मांगों को लेकर संघर्ष कर रहा है। इस दौरान ज्ञापन, धरना-प्रदर्शन और चरणबद्ध आंदोलनों के माध्यम से शासन का ध्यान आकृष्ट कराया गया, लेकिन अब तक अपेक्षित समाधान नहीं मिल पाया है।उन्होंने बताया कि 28 मार्च 2025 को 10 दिवसीय ऑनलाइन हड़ताल के बाद महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने पर्यवेक्षकों की बैठक लेकर वेतन विसंगति को न्यायसंगत एवं जायज मानते हुए शीघ्र दूर करने का आश्वासन दिया था। इसके बावजूद डेढ़ वर्ष बीतने के बाद भी मांग पूरी नहीं हुई है। इससे प्रदेशभर की पर्यवेक्षकों में नाराजगी और असंतोष बढ़ रहा है।संघ का कहना है कि पर्यवेक्षक विभागीय दायित्वों का लगातार निर्वहन कर रही हैं, लेकिन समयमान वेतनमान, क्रमोन्नति और यात्रा भत्ता (टीए) जैसी सुविधाएं भी समय पर नहीं मिल पा रही हैं। पिछले दो वर्षों से कई जिलों में पर्याप्त बजट आवंटन नहीं होने के कारण परेशानियां बढ़ी हैं। संघ ने आशंका जताई है कि आठवां वेतनमान लागू होने पर वेतन विसंगति दूर नहीं होने से पर्यवेक्षकों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। समान कार्य के बावजूद वेतन में असमानता कर्मचारियों के बीच स्थायी अंतर पैदा कर सकती है।ऋतु परिहार ने कहा कि राज्य सरकार ने वर्ष 2026 को महतारी गौरव वर्ष के रूप में मनाने का निर्णय लिया है, जिसका उद्देश्य महिलाओं का सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक सशक्तीकरण करना है। ऐसे में महिला एवं बाल विकास विभाग की महिला पर्यवेक्षकों की लंबित समस्याओं का समाधान नहीं होना विडंबनापूर्ण है। संघ की उपाध्यक्ष पूसमति चौहान ने मुनगा एप का विरोध करते हुए कहा कि एप में अब हर माह पौधे की फोटो लेकर डालना है बच्चो और महिलाओं के पोषण स्वास्थ्य शिक्षा की जिम्मेदारी महिला बाल विकास की है तो पौधों से जुड़े वन ,कृषि और उद्यानिकी को उक्त कार्य सौंपा जाना चाहिए ।संघ ने चेतावनी दी है कि मांगें पूरी नहीं होने पर प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना, पोषण ट्रैकर और महतारी वंदन योजना सहित अन्य ऑनलाइन कार्यों को बंद करने की दिशा में कदम उठाया जाएगा।संघ ने शासन-प्रशासन से मामले की गंभीरता को समझते हुए एक माह के भीतर सभी लंबित मांगों का निराकरण करने की अपील की है साथ ही महिला बाल विकास मंत्री से वेतन विसंगति को लेकर अबकी बार आर या पार की अपील करते हुए मिलने के लिए समय मांगा है सभी पर्यवेक्षकों में भारी असंतोष व्याप्त है मांगें पूरी नहीं होने पर प्रदेशभर की पर्यवेक्षक चरणबद्ध आंदोलन के लिए बाध्य होंगी।
विनोद गुप्ता-आरंग



