रायपुर संभाग स्तरीय प्रशिक्षण शिविर-सामाजिक समरसता ही कांग्रेस की आत्मा और देश की प्रगति का आधार स्तंभ-डॉ. शिवकुमार डहरिया
आरंग। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की मूल विचारधारा, सामाजिक समरसता और सामाजिक न्याय के संदेश को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाने के उद्देश्य से आयोजित रायपुर संभाग स्तरीय प्रशिक्षण शिविर में पूर्व मंत्री एवं वरिष्ठ कांग्रेस नेता डॉ. शिवकुमार डहरिया ने मुख्य वक्ता के रूप में शिरकत की। शिविर में संभागभर से आए पदाधिकारियों, प्रशिक्षकों, ब्लॉक अध्यक्षों और मास्टर ट्रेनर्स को संबोधित करते हुए डॉ. डहरिया ने “सामाजिक समरसता के पुरोधा” विषय पर अत्यंत प्रभावशाली और वैचारिक व्याख्यान दिया।
कार्यक्रम का शुभारंभ डॉ. डहरिया ने छत्तीसगढ़ी अस्मिता के प्रतीक “जय जोहार, जय छत्तीसगढ़ और जय कांग्रेस” के नारों के साथ किया। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि जब हम ‘सामाजिक समरसता’ की बात करते हैं, तो इसका अर्थ केवल एक साथ बैठना या मिलकर रहना नहीं है; बल्कि समाज के हर वर्ग, हर जाति, धर्म और तबके को सम्मान, अधिकार और समानता का अहसास कराना है। 138 से अधिक वर्षों का इतिहास गवाह है कि कांग्रेस ही इस देश में सामाजिक समरसता और सामाजिक न्याय की सबसे बड़ी ध्वजवाहक रही है।
महान पुरोधाओं के योगदान को किया याद
डॉ. शिवकुमार डहरिया ने अपने संबोधन में देश और प्रदेश के महान पुरोधाओं के योगदान को रेखांकित करते हुए कहा कि महात्मा गांधी जी ने छुआछूत मिटाने और शोषित वर्ग के कल्याण के लिए अपने आचरण से मिसाल कायम की। उन्होंने ‘हरिजन’ सेवा और ‘सत्य व अहिंसा’ के माध्यम से समाज के अंतिम व्यक्ति को मुख्यधारा से जोड़ने का ऐतिहासिक काम किया। पंडित नेहरू ने धर्मनिरपेक्षता (Secularism) और वैज्ञानिक दृष्टिकोण की मजबूत नींव रखी, ताकि धर्म और जाति से परे हर नागरिक को विकास के समान अवसर मिल सकें। बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर ने महाड़ सत्याग्रह से लेकर संविधान निर्माण तक, बाबा साहेब ने सदियों पुराने सामाजिक भेदभाव का अंत कर हर नागरिक को बराबरी का अधिकार दिया। सरदार पटेल ने 500 से अधिक रियासतों को एक सूत्र में पिरोया, श्रीमती इंदिरा गांधी ने ‘गरीबी हटाओ’ के संकल्प से वंचितों को हक दिलाया और राजीव गांधी जी ने ‘पंचायती राज’ के माध्यम से महिलाओं, एससी-एसटी वर्ग को सत्ता में सीधी भागीदारी दी।
छत्तीसगढ़ की माटी और समरसता की परंपरा
छत्तीसगढ़ के गौरवशाली इतिहास पर प्रकाश डालते हुए डॉ. डहरिया ने कहा कि परम पूज्य गुरु घासीदास जी का “मनखे-मनखे एक समान” का अमर संदेश ही कांग्रेस की विचारधारा का मूल आधार है। उन्होंने 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के शहीद वीर नारायण सिंह के बलिदान और पंडित सुंदरलाल शर्मा जी द्वारा ‘राजीव लोचन मंदिर’ में शोषित वर्ग के प्रवेश के ऐतिहासिक आंदोलनों को याद करते हुए उन्हें सामाजिक न्याय की अनूठी मिसाल बताया।
कार्यकर्ताओं से आह्वान और संकल्प
वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों पर चिंता जताते हुए डॉ. डहरिया ने कहा कि आज देश में नफरत फैलाने वाली शक्तियों द्वारा सामाजिक ताने-बाने को तोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। ऐसे दौर में ब्लॉक अध्यक्षों और मास्टर ट्रेनर्स की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है।उन्होंने उपस्थित सभी कार्यकर्ताओं को संकल्प दिलाते हुए कहा, “जब आप सभी मास्टर ट्रेनर्स और ब्लॉक अध्यक्ष क्षेत्र में जाएं, तो इस समरसता और सामाजिक न्याय के विचार को हर घर, हर गली और हर बूथ तक ले जाने का संकल्प लेकर जाएं। हमें जनता को याद दिलाना है कि कांग्रेस ही सर्वसमाज को साथ लेकर चलने वाली पार्टी है।”डॉ. डहरिया ने अपने वक्तव्य का समापन इन पंक्तियों से किया “जात-पात का भेद मिटाएं, सबको गले लगाएं,कांग्रेस की इस विचारधारा से, एक नया और सशक्त छत्तीसगढ़ बनाएं।”
प्रशिक्षण शिविर में वरिष्ठ पार्टी पदाधिकारी, विषय विशेषज्ञ प्रशिक्षक, रायपुर संभाग के विभिन्न जिलों के सैकड़ों ब्लॉक अध्यक्ष तथा मास्टर ट्रेनर्स उपस्थित रहे।
विनोद गुप्ता-आरंग



