शिक्षकों की लापरवाही पड़ेगी भारी-‘प्रशस्त’ व ‘लइका चिन्हारी’ ऐप में दिव्यांग बच्चों का डाटा छिपाया तो लगेगा 5 लाख तक जुर्माना
आरंग। विकासखंड आरंग के समस्त शासकीय विद्यालयों में विशेष आवश्यकता वाले (CWSN) बच्चों के सटीक चिन्हांकन हेतु वर्तमान में ‘प्रशस्त’ और ‘लइका चिन्हारी’ ऐप के माध्यम से व्यापक स्क्रीनिंग अभियान चलाया जा रहा है। समावेशी शिक्षा विभाग ने क्षेत्र के सभी प्राचार्यों एवं प्रधान पाठकों को कड़े निर्देश जारी करते हुए कहा है कि विद्यालय में दर्ज प्रत्येक विद्यार्थी की जांच पूरी पारदर्शिता, सतर्कता और ईमानदारी से की जाए। विभाग ने स्पष्ट किया है कि कार्यभार से बचने या किसी भी अन्य बहाने से दिव्यांग बच्चों की जानकारी छिपाना कानूनन गंभीर अपराध है। विकासखंड के स्पेशल एजुकेटर लोकेश कुमार साहू ने बताया कि अक्सर यह संज्ञान में आता है कि कुछ शिक्षक अतिरिक्त कार्य के भ्रम में CWSN बच्चों की सही जानकारी दर्ज नहीं करते हैं। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि बच्चों की जानकारी छिपाना अथवा गलत ब्योरा दर्ज करना दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 की धारा 89 के तहत दंडनीय अपराध है, जिसके अंतर्गत दोषी पाए जाने पर 10 हजार से लेकर 5 लाख रुपये तक के भारी जुर्माने का कड़ा कानूनी प्रावधान है। सही और पुख्ता डाटा होने पर ही इन बच्चों को शासन से सहायक उपकरण, एस्कॉर्ट भत्ता, विशेष शिक्षक और छात्रवृत्ति जैसी बुनियादी सुविधाएं मिल पाती हैं।।दिव्यांग विद्यार्थियों के संरक्षण हेतु विभिन्न कड़े कानूनों का हवाला देते हुए लोकेश साहू ने स्पष्ट किया कि दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 की धारा 92 के अनुसार यदि कोई भी व्यक्ति दिव्यांग बच्चे का सार्वजनिक उपहास करता है, ताना मारता है, डराता-धमकाता है या उसके सहायक उपकरण जैसे व्हीलचेयर, छड़ी, श्रवण यंत्र आदि को नुकसान पहुंचाता है, तो उसे 6 माह से 5 वर्ष तक के कारावास और जुर्माने की सजा हो सकती है। इसके साथ ही शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 की धारा 17 के तहत किसी भी बच्चे को शारीरिक दंड देना अथवा मानसिक रूप से प्रताड़ित करना पूरी तरह प्रतिबंधित है। वहीं किशोर न्याय अधिनियम, 2015 की धारा 75 के तहत बच्चे के प्रति क्रूरता या उपेक्षा बरतने पर 3 से 5 वर्ष की कैद व 1 लाख रुपये तक का जुर्माना तथा धारा 82 के तहत शारीरिक दंड देने पर 3 माह से 3 वर्ष तक की जेल का प्रावधान है।उन्होंने आगे कहा कि इन कड़े प्रावधानों का मूल उद्देश्य विद्यालयों में CWSN बच्चों के प्रति संवेदनशील, सहयोगात्मक और समावेशी वातावरण तैयार करना है, ताकि किसी भी दिव्यांग बच्चे को किसी भी प्रकार के मानसिक दबाव, हीनभावना या उपहास का सामना न करना पड़े। समावेशी व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से विकासखंड स्तर पर प्रतिवर्ष शिक्षकों, अभिभावकों एवं बच्चों हेतु विशेष उन्मुखीकरण और संवेदीकरण प्रशिक्षण का आयोजन भी निरंतर किया जाता है।
विनोद गुप्ता-आरंग



