ज्ञानभारतम मिशन’ को फिर मिली बड़ी सफलता-मिली 111 वर्ष पुरानी हस्तलिखित दुर्लभ पांडुलिपियां
आरंग। ऐतिहासिक और धार्मिक नगरी आरंग, जो राजा मोरध्वज की प्राचीन नगरी के रूप में विख्यात है, एक बार फिर अपनी प्राचीन सांस्कृतिक और साहित्यिक विरासत को लेकर सुर्खियों में है। भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय द्वार संचालित ‘ज्ञानभारतम मिशन के तहत आरंग में सर्वे टीम को एक बहुत बड़ी सफलता हाथ लगी है। यहाँ के ब्राह्मण पारा निवासी 64 वर्षीय आचार्य दिलीप शर्मा के घर से लगभग 111 वर्ष पुरानी अत्यंत दुर्लभ हस्तलिखित पांडुलिपियां प्राप्त हुई हैं।ये अमूल्य पांडुलिपियां आचार्य दिलीप शर्मा के दादा, अपने समय के प्रकांड विद्वान, संस्कृताचार्य और भागवताचार्य स्व. घनाराम पौराणिक द्वारा अपने हाथों से लिखी गई थीं। एक सदी से भी अधिक पुरानी होने के बावजूद ये पांडुलिपियां आज भी सुरक्षित हैं और इनमें समाहित ज्ञान आज के आधुनिक युग में भी पूरी तरह प्रासंगिक है।प्राप्त दुर्लभ ग्रंथों में मुख्य रूप से दुर्गा सप्तशती, सविच्छेद रुद्राभिषेक,श्रीमद गीता,सुंदरकांड, साखोचार, वास्तु विवाह संस्कार,श्राद्ध विधि,नित्यकर्म पूजन,बटुक भैरव पूजन विधि आदि शामिल है। साथ ही सर्वे के दौरान जानकारी सामने आई कि आचार्य स्व घनाराम जी ने माता नर्मदा जी की तीन सम्पूर्ण परिक्रमा की थी तथा शिक्षा व संस्कृति का अलख जगाने उनके द्वारा कुमारेश्वर महादेव मंदिर में श्री श्री 1008 गोपाल संस्कृत पाठशाला की शुरुवात की गई थी।ज्ञानभारतम मिशन के तहत प्राचीन ज्ञान को सहेजने का यह महा-सर्वे अभियान उच्च प्रशासनिक जिला कलेक्टर रायपुर डॉ गौरव कुमार सिंह के मार्गदर्शन एवं नगरनिगम उपायुक्त रायपुर जिला नोडल अधिकारी डॉ अंजली शर्मा,जिला समन्वयक डॉ कामिनी बावनकर के निर्देशन एवं विकासखंड शिक्षा अधिकारी दिनेश शर्मा आरंग के दिशा निर्देशों के अनुरूप सर्वे टीम नवाचारी शिक्षक गण अरविन्द कुमार वैष्णव,महेंद्र कुमार पटेल, शीला गुरु गोस्वामी के द्वारा किया जा रहा है जिसमें प्राचार्य माणिक लाल मिश्रा, संकुल समन्वयक हरीश दीवान एवं आचार्य गण संदीप शर्मा, अजीत शर्मा एवं सजल शर्मा, सौम्य शर्मा की उपस्थिति रही। बीईओ आरंग से प्राप्त जानकारी के अनुसार इन अमूल्य धरोहरों का डिजिटलीकरण कर इन्हें भविष्य की पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखा जाएगा एवं वरिष्ठ गण से सतत संपर्क किया जा रहा है।
विनोद गुप्ता-आरंग



