पोरा पर्व पर थमा खेती-किसानी का काम-हुई बैलों की पूजा
आरंग। छत्तीसगढ़ की लोकपरंपरा और कृषि संस्कृति से जुड़े पोरा पर्व को आरंग क्षेत्र के गांवों में किसानों ने उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया गया । पर्व के अवसर पर किसानों ने कृषि कार्य बंद रखा और खेती में सालभर साथ देने वाले बैलों व पशुधन के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए उनकी पूजा-अर्चना की।सुबह से ही किसान परिवारों में पर्व को लेकर उत्साह रहा। बैलों को नहलाकर सजाया-संवारा गया और विधिवत पूजा कर उन्हें पकवान खिलाए गए। किसानों का मानना है कि कृषि कार्य में पशुधन का योगदान महत्वपूर्ण है, इसलिए पोरा पर्व उनके प्रति सम्मान और आभार प्रकट करने का अवसर है।वहीं बच्चों में भी पोरा को लेकर खास उत्साह देखने को मिला। उन्होंने मिट्टी के बैल और खिलौना गाड़ियों को सजाकर पर्व की खुशियां मनाईं। गांवों में दिनभर पारंपरिक उल्लास का माहौल रहा। पोरा पर्व ने एक बार फिर ग्रामीण जीवन, खेती-किसानी और पशुधन से जुड़ी छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोकसंस्कृति की झलक दिखाई।
विनोद गुप्ता-आरंग



