26 साल से सड़क-पुल की आस, अब मुख्यमंत्री को भेजे 232 पोस्टकार्ड।पड़कीपाली के ग्रामीणों ने चलाया पोस्टकार्ड अभियान, सड़क सत्याग्रह और धरना प्रदर्शन की बनाई रणनीति

खल्लारी/बागबाहरा। खल्लारी विधानसभा क्षेत्र के बागबाहरा विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत मरार कसहीबाहरा के आश्रित ग्राम पड़कीपाली में नाले पर पुल निर्माण और बदहाल कच्ची सड़क को पक्की बनाने की मांग एक बार फिर तेज हो गई है। गांव के ग्रामीण और युवा पिछले 26 वर्षों से सड़क और पुल निर्माण की मांग को लेकर शासन-प्रशासन के समक्ष आवेदन और ज्ञापन प्रस्तुत करते आ रहे हैं। सैकड़ों बार गुहार लगाने के बावजूद मांग पूरी नहीं होने से ग्रामीणों में निराशा है। हालांकि, ग्रामीणों ने अब भी उम्मीद नहीं छोड़ी है और अपनी मांग को सरकार तक पहुंचाने के लिए पोस्टकार्ड अभियान शुरू किया है।

इस अभियान के तहत गांव के महिला, पुरुष, बुजुर्ग, किसान, युवा और स्कूली बच्चों ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नाम पोस्टकार्ड लिखकर नाले पर पुल निर्माण तथा पक्की सड़क मार्ग की शीघ्र स्वीकृति देने की मांग की है। ग्रामीणों ने बागबाहरा डाकघर के माध्यम से करीब 232 पोस्टकार्ड मुख्यमंत्री के कार्यालय को प्रेषित किए हैं।
करीब 400 की आबादी वाले आदिवासी बाहुल्य ग्राम पड़कीपाली में सड़क और पुल का अभाव लंबे समय से आवागमन में बाधा बना हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि छत्तीसगढ़ राज्य गठन के बाद से ही वे गांव को मुख्य सड़क से जोड़ने और नाले पर पुल निर्माण की मांग कर रहे हैं, लेकिन अब तक उनकी मांग पूरी नहीं हो सकी है। ऐसे में गांव के समग्र विकास के लिए ग्रामीण अब चरणबद्ध तरीके से अपनी आवाज बुलंद कर रहे हैं।

पोस्टकार्ड अभियान को सफल बनाने और गांव की समस्याओं को प्रमुखता से उठाने में भुनेश निषाद, मनोज ध्रुव, गंगेश ध्रुव, दीपक ध्रुव, एवन ध्रुव, पंकज ध्रुव, गोविन्द यादव, तुकाराम ध्रुव, नरेंद्र निषाद, नूतन ध्रुव, थानसिंग यादव, ओमलाल निषाद, लालजी ध्रुव, धनीराम ध्रुव, भागवत ध्रुव, टीकाराम ध्रुव और मकुन्द निषाद सहित अन्य ग्रामीणों का विशेष योगदान रहा है।
आंदोलन को लेकर बनी रणनीति, सड़क सत्याग्रह की तैयारी
सड़क और पुल निर्माण की मांग पूरी नहीं होने पर अब ग्रामीणों ने आंदोलन की रणनीति तैयार की है। ग्रामीणों के अनुसार, नवंबर माह के पहले सप्ताह में सड़क सत्याग्रह और धरना-प्रदर्शन के माध्यम से अपनी मांग शासन-प्रशासन तक पहुंचाई जाएगी। इस आंदोलन में गांव की महिलाएं, पुरुष, बुजुर्ग, किसान, युवा और स्कूली बच्चे भी शामिल होंगे।
ग्रामीणों और युवाओं में सड़क तथा पुल निर्माण को लेकर क्षेत्रीय विधायक और सांसद के प्रति नाराजगी भी बताई जा रही है। गांव की समस्याओं को सामने लाने के लिए युवाओं ने इंस्टाग्राम पर ‘पड़कीपाली सड़क बनाओ’ नाम से एक मंच बनाया है, जहां गांव की बदहाल सड़क और आवागमन से जुड़ी समस्याओं के वीडियो साझा किए जा रहे हैं।
पोस्टकार्ड अभियान पूरा होने के बाद ग्रामीणों और युवाओं के नेतृत्व में गांव से राष्ट्रीय राजमार्ग क्रमांक 353 स्थित हाडाबंद ओवरब्रिज तक करीब साढ़े तीन किलोमीटर की पदयात्रा निकालने की योजना है। इसके बाद मुख्य मार्ग के किनारे धरना-प्रदर्शन कर सड़क और पुल निर्माण की मांग उठाई जाएगी। आंदोलन स्थल पर जिला और विकासखंड स्तर के अधिकारियों को राज्यपाल तथा मुख्यमंत्री के नाम हस्ताक्षरयुक्त ज्ञापन सौंपने की भी योजना है।
इस संबंध में ग्रामीणों और युवाओं ने महासमुंद कलेक्टर, बागबाहरा एसडीएम, तहसीलदार तथा खल्लारी थाना को सूचना पत्र प्रेषित कर आंदोलन के दौरान आवश्यक सहयोग का अनुरोध किया है।
बरसात में टापू बन जाता है पड़कीपाली
महासमुंद जिला मुख्यालय से लगभग 18 किलोमीटर दूर स्थित आदिवासी बाहुल्य ग्राम पड़कीपाली के ग्रामीणों को आज भी राष्ट्रीय राजमार्ग क्रमांक 353 से गांव तक पहुंचने के लिए साढ़े तीन किलोमीटर लंबे कच्चे मार्ग पर निर्भर रहना पड़ता है। ग्रामीणों के अनुसार, मार्ग में नाले पर पुल नहीं होने और सड़क की बदहाल स्थिति के कारण बारिश के दिनों में आवागमन बुरी तरह प्रभावित हो जाता है। कई बार गांव का संपर्क बाहरी क्षेत्र से लगभग कट जाता है और गांव टापू जैसी स्थिति में पहुंच जाता है।
ग्रामीणों का कहना है कि बारिश के दौरान सड़क और पुल के अभाव में आपातकालीन सेवाओं को गांव तक पहुंचने में भी परेशानी होती है। आवागमन प्रभावित होने से ग्रामीणों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। वहीं, राशन लेने के लिए पंचायत मुख्यालय मरार कसहीबाहरा तक पगडंडी और कच्चे रास्ते से जाना उनकी मजबूरी बन जाता है।
विधानसभा और लोकसभा चुनाव के दौरान मतदान करने के लिए भी ग्रामीणों को लगभग तीन किलोमीटर की दूरी तय कर ओकारबंद मतदान केंद्र तक जाना पड़ता है। इसके अलावा गांव में मोबाइल नेटवर्क की स्थिति भी मजबूत नहीं होने की समस्या बताई जाती है।
ग्रामीणों का कहना है कि मुख्य राष्ट्रीय राजमार्ग से गांव की दूरी महज साढ़े तीन किलोमीटर होने के बावजूद पक्की सड़क और पुल के अभाव में विकास की सुविधाएं उन तक पूरी तरह नहीं पहुंच पा रही हैं। वर्षों से आवेदन, ज्ञापन और मांग उठाने के बाद भी समस्या का समाधान नहीं होने से ग्रामीणों में नाराजगी है।
ग्रामीणों को उम्मीद है कि मुख्यमंत्री को भेजे गए 232 पोस्टकार्ड और प्रस्तावित सड़क सत्याग्रह के बाद उनकी मांग पर शासन-प्रशासन गंभीरता से विचार करेगा तथा गांव में पक्की सड़क और नाले पर पुल निर्माण की दिशा में ठोस पहल होगी।
