लगातार बारिश से किसानों की बढ़ी परेशानी-तीसरी बार बोनी के बाद भी नहीं जगा धान-किसानों ने की ये मांग
आरंग। आरंग तहसील में लगातार हो रही तेज बारिश से धान की फसल प्रभावित हो रही है। कई गांवों में किसानों को तीसरी बार बोवनी करने के बाद भी खेतों में पौधे तैयार नहीं हो पा रहे हैं। जलभराव के कारण बीज और अंकुर खराब होने से किसानों की लागत बढ़ गई है। प्रभावित किसानों ने प्रशासन से सर्वे कराकर बीज सहायता और फसल बीमा के तहत मुआवजा देने की मांग की।विदित हो कि खरीफ सीजन में लगातार हो रही बारिश अब किसानों के लिए परेशानी का कारण बनती जा रही है। आरंग तहसील के कई गांवों में धान की फसल प्रभावित हो रही है। स्थिति यह है कि कई किसानों को तीसरी बार धान की बोवनी करनी पड़ रही है, लेकिन इसके बाद भी खेतों में पौधे तैयार नहीं हो पा रहे हैं।किसानों के मुताबिक लगातार बारिश के कारण खेतों में लंबे समय तक पानी जमा रह रहा है। इससे धान के बीज अंकुरित होने के बाद गलकर खराब हो जा रहे हैं। कई जगहों पर नन्हे पौधे भी पानी में नष्ट हो गए हैं। किसानों का कहना है कि बार-बार बोवनी करने से उनकी लागत बढ़ गई है, लेकिन मौसम की मार के कारण मेहनत और पैसा दोनों का नुकसान उठाना पड़ रहा है।ग्रामीण किसानों ने बताया कि खरीफ सीजन की शुरुआत में पर्याप्त बारिश नहीं होने के कारण बोवनी में देरी हुई थी। अब जब बारिश शुरू हुई तो लगातार तेज वर्षा और जलभराव ने नई समस्या खड़ी कर दी है। खेतों की स्थिति ऐसी हो गई है कि दोबारा बोवनी के बाद भी फसल संभल नहीं पा रही है।किसानों का कहना है कि कृषि ऋण लेते समय फसल बीमा का प्रीमियम बैंक और सहकारी समितियों के माध्यम से काट लिया जाता है, लेकिन जब शुरुआती चरण में ही बीज खराब हो जाता है तो उन्हें तत्काल राहत नहीं मिलती। किसानों ने मांग की है कि बारिश से बीज खराब होने और पुनर्बोवनी की स्थिति को भी फसल बीमा के दायरे में शामिल किया जाए।सर्वे कर मुआवजा देने की मांग।प्रभावित किसानों ने शासन-प्रशासन से मांग की है कि जिन खेतों में लगातार बारिश और जलभराव के कारण धान की बोवनी खराब हुई है, उनका जल्द सर्वे कराया जाए। साथ ही किसानों को दोबारा बोवनी के लिए बीज सहायता और आर्थिक मुआवजा उपलब्ध कराया जाए, ताकि वे खेती को संभाल सकें। किसानों का कहना है कि यदि समय पर राहत नहीं मिली तो इस साल धान उत्पादन पर बड़ा असर पड़ सकता है। बढ़ती लागत, महंगे बीज और मौसम की अनिश्चितता ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। अब उनकी उम्मीदें प्रशासन की राहत व्यवस्था और बीमा सहायता पर टिकी हुई।
विनोद गुप्ता-आरंग



