महासमुंद में भूमिहीन न्याय योजना खुद मांग रही न्याय! गरीबों की राशि दूसरे खातों में ट्रांसफर होने का आरोप, जांच के घेरे में जनपद कार्यालय

महासमुंद। छत्तीसगढ़ सरकार की महत्वाकांक्षी पंडित दीनदयाल उपाध्याय भूमिहीन कृषि मजदूर न्याय योजना महासमुंद जिले में गंभीर अनियमितताओं के आरोपों के कारण सवालों के घेरे में आ गई है। जिन गरीब भूमिहीन हितग्राहियों को हर वर्ष ₹10,000 की आर्थिक सहायता मिलनी चाहिए, उनकी राशि कथित तौर पर दूसरे लोगों के बैंक खातों में पहुंच रही है। लगातार सामने आ रही शिकायतों ने न केवल योजना के क्रियान्वयन पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि जनपद पंचायत स्तर पर बड़े फर्जीवाड़े की आशंका भी पैदा कर दी है।
हितग्राहियों के खाते की जगह दूसरे के खाते में पहुंच रही राशि
जानकारी के अनुसार, योजना के तहत प्रत्येक पात्र भूमिहीन हितग्राही को प्रतिवर्ष ₹10,000 की सहायता राशि प्रदान की जाती है। इसके लिए दिसंबर माह में सभी हितग्राहियों का सत्यापन कराया गया था। जिला पंचायत द्वारा सभी ग्राम पंचायत सचिवों को निर्देश जारी कर पात्र हितग्राहियों का सत्यापन कर जानकारी जनपद पंचायत को उपलब्ध कराने कहा गया था।
आरोप है कि पंचायत स्तर पर सत्यापन सही तरीके से होने के बावजूद जनपद पंचायत में ऑनलाइन डेटा अपडेट करने के दौरान बैंक खाते की जानकारी में छेड़छाड़ की गई। हितग्राहियों का नाम, पता और अन्य विवरण तो सही रखा गया, लेकिन बैंक खाते के स्थान पर कथित रूप से किसी अन्य व्यक्ति का खाता नंबर दर्ज कर दिया गया। परिणामस्वरूप शासन से जारी राशि वास्तविक हितग्राही के बजाय दूसरे खातों में पहुंचने लगी।
छह महीने पहले भी हुई थी शिकायत
इस मामले की पहली शिकायत जनवरी 2026 में सामने आई थी। ग्राम मुस्की निवासी सुशीला निषाद ने जिला पंचायत के तत्कालीन सीईओ को लिखित शिकायत देकर बताया था कि उनकी भूमिहीन न्याय योजना की राशि उनके खाते में न जाकर सुशीला चंद्राकर नामक महिला के पंजाब नेशनल बैंक खाते में जमा हो रही है। उन्होंने राशि अपने खाते में स्थानांतरित कराने की मांग की थी।
उस समय तत्कालीन जिला पंचायत सीईओ द्वारा पांच सदस्यीय जांच दल गठित करने की बात कही गई थी, लेकिन छह माह बीत जाने के बाद भी जांच का कोई परिणाम सामने नहीं आया।
अब दूसरा मामला भी आया सामने
इसी बीच अब महासमुंद जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम चौकबड़ा निवासी खुशराम ने भी जनपद पंचायत सीईओ को शिकायत सौंपी है। खुशराम का आरोप है कि पिछले तीन वर्षों से उनकी योजना की राशि भी उनके खाते में न जाकर सुशीला चंद्राकर के बंधन बैंक खाते में जमा हो रही है।
खुशराम ने बताया कि शिकायत करने पर जनपद पंचायत के एक ऑपरेटर ने उन्हें हितग्राही विवरण की पर्ची दी। उसमें उनका नाम, पता और अन्य सभी विवरण सही दर्ज थे, लेकिन बैंक खाते के स्थान पर किसी अन्य व्यक्ति का बैंक खाता नंबर और आईएफएससी कोड दर्ज था। जब उन्होंने संबंधित बैंक में जानकारी ली तो पुष्टि हुई कि योजना की राशि दूसरे खाते में जमा हो रही है।
एक ही नाम बार-बार आने से बढ़े संदेह
सबसे बड़ा सवाल यह है कि पहले मामले में भी राशि सुशीला चंद्राकर के खाते में जाने की शिकायत हुई थी और अब दूसरे मामले में भी उसी नाम का उल्लेख सामने आया है। हालांकि दोनों मामलों में अलग-अलग बैंक खातों का जिक्र है। इससे संदेह और गहरा गया है कि कहीं योजना के डेटा में व्यवस्थित तरीके से छेड़छाड़ तो नहीं की गई।
ऑपरेटरो पर भी उठ रहे सवाल
पीड़ित हितग्राहियों का आरोप है कि जब उन्होंने जनपद कार्यालय में इस संबंध में जानकारी मांगी तो संबंधित ऑपरेटर ने कथित रूप से राशि वापस कराने की बात कही। यदि यह आरोप सही पाए जाते हैं तो यह केवल तकनीकी त्रुटि नहीं, बल्कि गंभीर वित्तीय अनियमितता और धोखाधड़ी का मामला हो सकता है।
लाखों रुपये के घोटाले की आशंका
लगातार सामने आ रही शिकायतों के बाद अब यह आशंका जताई जा रही है कि यदि सभी हितग्राहियों के बैंक खातों की जांच की जाए तो लाखों रुपये की गड़बड़ी सामने आ सकती है। सवाल यह भी उठ रहा है कि जब पंचायत सचिवों ने सत्यापन के दौरान सही जानकारी भेजी थी, तो जनपद स्तर पर बैंक खातों में बदलाव किसने और कैसे किया।
कलेक्टर ने दिए जांच के निर्देश
इस पूरे मामले पर महासमुंद कलेक्टर विनय कुमार लंगेह ने कहा कि शिकायतें संज्ञान में आई हैं। मामले की जानकारी भू-अभिलेख शाखा और संबंधित एसडीएम से मांगी गई है। यदि जांच में किसी प्रकार की गड़बड़ी या अनियमितता सामने आती है तो दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
अब उठ रहे बड़े सवाल…..
पंचायत सचिवों द्वारा भेजी गई जानकारी के बाद बैंक खाते किस स्तर पर बदले गए?
क्या यह केवल कुछ मामलों तक सीमित है या पूरे जिले में ऐसी गड़बड़ी हुई है?
छह महीने पहले हुई शिकायत की जांच अब तक पूरी क्यों नहीं हुई?
यदि राशि दूसरे खातों में गई है तो उसकी जवाबदेही किसकी होगी?
क्या भूमिहीन न्याय योजना में बड़े स्तर पर वित्तीय गड़बड़ी हुई है?
अब सबकी निगाहें प्रशासनिक जांच पर टिकी हैं। यदि शिकायतें सही साबित होती हैं तो यह महासमुंद जिले में भूमिहीन न्याय योजना से जुड़ा अब तक का सबसे बड़ा फर्जीवाड़ा साबित हो सकता है।

