मानसून की दगाबाजी और पंचायत के फैसले की किसानों पर दोहरी मार-अब किराए के टैंकरों से सींचा जा रहा सरना धान का थरहा-संकट में 15 एकड़ की खेती
आरंग। छत्तीसगढ़ में मानसून की कछुआ चाल और खंड वर्षा ने अन्नदाताओं की माथे पर चिंता की लकीरें गहरी कर दी हैं। आसमान से राहत की बौछारें न गिरने के कारण खरीफ सीजन की शुरुआत में ही किसान बेबस नजर आ रहे हैं। आरंग विकासखंड के ग्राम देवदा में तो हालात और भी बदतर हो चुके हैं। यहाँ मौसम की बेरुखी के बीच स्थानीय व्यवस्था ने भी किसानों से मुंह मोड़ लिया है, जिसके चलते किसान अब भारी-भरकम रकम खर्च कर किराए के टैंकरों से अपने खेतों की प्यास बुझाने को मजबूर हैं।ग्राम देवदा के कृषक केशव कुर्रे और सिकंदर सोनवानी इस समय इसी दोहरी मार से जूझ रहे हैं। किसानों ने लगभग 15 दिन पहले अपने खेतों में सरना धान की बुआई की थी। धान की नर्सरी यानी थरहा तैयार करने के लिए इस समय पानी की सबसे ज्यादा जरूरत होती है, लेकिन खंड वर्षा के कारण खेत सूखे पड़े हैं। इस विकट परिस्थिति में किसानों को उम्मीद थी कि वे गांव के पारंपरिक तालाब से पानी लेकर अपनी फसल बचा लेंगे, लेकिन ग्राम पंचायत ने नियमों का हवाला देते हुए तालाब का पानी सिंचाई के लिए देने से साफ मना कर दिया। पंचायत के इस अप्रत्याशित फैसले ने जल संकट से जूझ रहे किसानों की मुश्किलें कई गुना बढ़ा दी हैं।पंचायत से निराशा हाथ लगने के बाद फसल को दम तोड़ता देख किसानों ने अपनी गाढ़ी कमाई दांव पर लगा दी है।

किसान केशव कुर्रे, जो 5 एकड़ में घरेलू खेती कर रहे हैं, और 10 एकड़ में खेती कर रहे बड़े कृषक सिकंदर सोनवानी ने अब किराए के वॉटर टैंकरों का सहारा लिया है। दोनों किसानों की कुल 15 एकड़ भूमि को जिंदा रखने के लिए अब तक दो बार टैंकरों से पानी मंगाकर सिंचित किया जा चुका है। चिलचिलाती धूप और सूखे के बीच इतने बड़े रकबे को टैंकर के पानी से बचाए रखना किसी चुनौती से कम नहीं है। टैंकरों का किराया चुकाने के कारण किसानों पर भारी आर्थिक बोझ आ पड़ा है। अगर आने वाले कुछ दिनों में क्षेत्र में झमाझम बारिश नहीं हुई, तो किराए के पानी के भरोसे इस लागत को वहन कर पाना किसानों के बूते से बाहर हो जाएगा। ग्रामीणों का कहना है कि संकट की इस घड़ी में न तो कृषि विभाग सुध ले रहा है और न ही स्थानीय प्रशासन। यदि समय रहते इन किसानों को राहत नहीं पहुंचाई गई, तो देवदा के इन अन्नदाताओं की मेहनत और पूंजी दोनों मिट्टी में मिल जाएगी।
विनोद गुप्ता-आरंग



