गरीबों के आशियाने उजाड़ने से पहले पुनर्वास क्यों नहीं..?…नकटी में प्रशासन की कार्रवाई पर डॉ. शिवकुमार डहरिया ने उठाये सवाल….
आरंग। माना क्षेत्र के नकटी गांव में विधायक कॉलोनी के लिए वर्षों से बसे ग्रामीणों के मकानों पर चलाए जा रहे बुलडोजर अभियान को पूर्व मंत्री एवं वरिष्ठ कांग्रेस नेता डॉ. शिवकुमार डहरिया ने गरीब, दलित सतनामी व ओ बी सी समाज के खिलाफ अन्यायपूर्ण और अमानवीय कार्रवाई बताया है। उन्होंने कहा कि जिस गांव में बड़ी संख्या में सतनामी समाज के लोग पीढ़ियों से निवास कर रहे हैं, वहां बिना समुचित पुनर्वास की व्यवस्था किए घरों को तोड़ना सरकार की असंवेदनशील कार्यशैली को दर्शाता है।डॉ. डहरिया ने कहा कि यदि प्रशासन का दावा है कि यह भूमि सरकारी है और उस पर अवैध कब्जा था, तो सबसे बड़ा सवाल यह है कि सालों तक सरकार और प्रशासन आखिर चुप क्यों रहे? यदि बस्ती अवैध थी, तो प्रधानमंत्री आवास योजना और इंदिरा आवास योजना के तहत मकानों की स्वीकृति किस आधार पर दी गई? बिजली कनेक्शन, पानी, सड़क, राशन कार्ड, मतदाता पहचान पत्र तथा अन्य सरकारी सुविधाएं किस आधार पर उपलब्ध कराई गईं?उन्होंने कहा कि चुनाव के समय इन्हीं लोगों के वोट वैध थे, लेकिन आज उनका आशियाना अवैध कैसे हो गया? यदि वर्षों से शासन-प्रशासन स्वयं इस बस्ती को मान्यता देता रहा, तो अचानक गरीबों को अतिक्रमणकारी घोषित कर बेदखल करना न्यायसंगत नहीं कहा जा सकता।डॉ. डहरिया ने आरोप लगाया कि विधायक कॉलोनी बनाने के नाम पर गरीबों के आशियाने उजाड़े जा रहे हैं। किसी भी लोकतांत्रिक सरकार का पहला दायित्व प्रभावित परिवारों के पुनर्वास की व्यवस्था करना होता है, लेकिन यहां पहले बुलडोजर चलाया गया और बाद में पुनर्वास की बात कही जा रही है। यह संवेदनहीन और दुर्भाग्यपूर्ण है।उन्होंने कहा कि प्रशासन यदि वास्तव में पुनर्वास करना चाहता था, तो पहले प्रत्येक परिवार को वैकल्पिक आवास उपलब्ध कराता, उसके बाद ही कोई कार्रवाई की जाती। महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों को खुले आसमान के नीचे लाकर खड़ा कर देना किसी भी सभ्य समाज के लिए उचित नहीं कहा जा सकता।डॉ. डहरिया ने कहा कि सरकार को यह भी स्पष्ट करना चाहिए कि यदि नकटी गांव अवैध था, तो वर्षों तक सरकारी योजनाओं का लाभ वहां कैसे पहुंचता रहा? प्रधानमंत्री आवास की किस्तें किस आधार पर जारी हुईं? सरकारी बिजली के खंभे क्यों लगाए गए? राशन कार्ड और मतदाता सूची में नाम कैसे दर्ज हुए? इन सभी सवालों का जवाब सरकार को प्रदेश की जनता के सामने देना चाहिए।उन्होंने मांग की कि नकटी गांव में चल रही बेदखली की कार्रवाई तत्काल रोकी जाए, प्रभावित परिवारों का सम्मानजनक पुनर्वास सुनिश्चित किया जाए तथा पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए। गरीबों के सिर से छत छीनकर जनप्रतिनिधियों के लिए कॉलोनी बनाना सामाजिक न्याय और लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत है।
विनोद गुप्ता-आरंग



