आरबीएसके एवं चिरायु योजना-04 नन्हे बच्चों को मिली सुनने और बोलने की नई जिंदगी-AIIMS रायपुर में सफल कॉक्लियर इम्प्लांट सर्जरी से बदली चार परिवारों की जिंदगी
आरंग।राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (RBSK) के अंतर्गत विकासखंड आरंग में नियमित स्वास्थ्य परीक्षण के दौरान जन्मजात बहरापन (Congenital Deafness) से पीड़ित चार बच्चों की समय पर पहचान की गई। इनमें ग्राम चपरीद निवासी गर्वी साहू, ग्राम नकटा निवासी 3 वर्षीय गनिका सोनी, ग्राम कुटेला निवासी 1 वर्ष 6 माह की तेजस्वी सिन्हा एवं ग्राम कुटेला निवासी 8 वर्षीय तनुजा सिन्हा शामिल हैं। आरबीएसके टीम द्वारा आवश्यक जांच एवं परामर्श के पश्चात सभी बच्चों को चिरायु योजना के अंतर्गत उपचार हेतु AIIMS रायपुर रेफर किया गया।AIIMS रायपुर में विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा विस्तृत जांच एवं आवश्यक परीक्षण के उपरांत चारों बच्चों की कॉक्लियर इम्प्लांट सर्जरी सफलतापूर्वक संपन्न की गई। सर्जरी के पश्चात सभी बच्चों की नियमित मैपिंग, स्पीच थेरेपी एवं श्रवण प्रशिक्षण प्रारंभ किया गया। वर्तमान में चारों बच्चों की थेरेपी नियमित रूप से जारी है तथा वे ध्वनियों पर सकारात्मक प्रतिक्रिया दे रहे हैं। उनकी सुनने एवं बोलने की क्षमता में निरंतर सुधार हो रहा है, जिससे उनके अभिभावकों में नई उम्मीद और आत्मविश्वास का संचार हुआ है।कभी अपने बच्चों के भविष्य को लेकर चिंतित रहने वाले इन परिवारों के लिए आज यह उपचार किसी वरदान से कम नहीं है। कॉक्लियर इम्प्लांट जैसी लाखों रुपये लागत वाली सर्जरी चिरायु योजना के माध्यम से पूर्णतः निःशुल्क उपलब्ध होने से इन परिवारों को आर्थिक राहत भी मिली और बच्चों को सामान्य जीवन की ओर बढ़ने का अवसर प्राप्त हुआ।यह सफलता आरबीएसके एवं चिरायु योजना के प्रभावी क्रियान्वयन का उत्कृष्ट उदाहरण है, जिसमें समय पर पहचान, उचित परामर्श, शीघ्र रेफरल, विशेषज्ञ उपचार तथा नियमित फॉलो-अप के माध्यम से चार बच्चों के जीवन में सुनने एवं बोलने की नई शुरुआत संभव हो सकी। यह पहल न केवल इन बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की मजबूत नींव है, बल्कि अन्य अभिभावकों के लिए भी प्रेरणा है कि बच्चों में श्रवण संबंधी किसी भी समस्या के लक्षण दिखाई देने पर समय रहते जांच एवं उपचार अवश्य कराएं।इस उपलब्धि में बीएमओ डॉ. विजय लक्ष्मी अनंत के मार्गदर्शन एवं विशेष सहयोग के साथ चिरायु टीम के डॉ. भूपेश गेंद्रे (चिकित्सा अधिकारी), डॉ. शिल्पा कटारिया (चिकित्सा अधिकारी), विनीत कुमार (फार्मासिस्ट) एवं परनिता वर्मा (एएनएम) का महत्वपूर्ण योगदान रहा। टीम द्वारा चारों बच्चों की समय पर पहचान, अभिभावकों को उचित परामर्श, AIIMS रायपुर में रेफरल, आवश्यक समन्वय तथा नियमित फॉलो-अप सुनिश्चित किया गया, जिसके परिणाम स्वरूप चारों बच्चों के जीवन में सुनने एवं बोलने की नई शुरुआत संभव हो सकी।
विनोद गुप्ता-आरंग



