जनगणना पोर्टल में ‘छत्तीसगढ़ी भाषा’ को शामिल करने हेतु इन्होंने खोला मोर्चा-सौंपा ज्ञापन
आरंग। जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी और छत्तीसगढ़िया क्रान्ति सेना के संयुक्त प्रतिनिधिमंडल द्वारा प्रदेशव्यापी अभियान के तहत रायपुर, रायगढ़, महासमुंद, बेमेतरा, मुंगेली , बलौदाबाज़ार, धमतरी और कोरबा सहित प्रदेश के विभिन्न जिलों में जिला कलेक्टर के माध्यम से केंद्र सरकार के नाम ज्ञापन सौंपा गया। प्रतिनिधिमंडल की प्रमुख मांग है कि भारत सरकार द्वारा आगामी स्व-जनगणना पोर्टल (2026-27) एवं घर घर जाकर भरवाए जाने वाले जनगणना फ़ार्म के ‘मातृभाषा’ कॉलम में ‘छत्तीसगढ़ी भाषा’ के विकल्प को अनिवार्य रूप से शामिल किया जाए।
छत्तीसगढ़ी अस्मिता और सम्मान की लड़ाई :
संगठन के पदाधिकारियों ने जोर देते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ और पड़ोसी राज्यों को मिलाकर लगभग 3.5 करोड़ लोग अपनी रोजमर्रा की बातचीत में छत्तीसगढ़ी भाषा का प्रयोग करते हैं। वर्ष 2007 में छत्तीसगढ़ी भाषा को विधिवत ‘राजभाषा’ का दर्जा मिल चुका है। इसके बावजूद, केंद्रीय कार्यक्रमों में छत्तीसगढ़ी भाषा की उपेक्षा प्रदेशवासियों की भावनाओं और उनकी भाषाई पहचान का अपमान है।
सही आंकड़ों का अभाव :
प्रतिनिधिमंडल ने चिंता व्यक्त की है कि यदि पोर्टल में छत्तीसगढ़ी का स्पष्ट विकल्प नहीं दिया गया, तो मातृभाषा के आधार पर होने वाली गणना में कभी भी सही आंकड़े सामने नहीं आ पाएंगे। इससे न केवल भाषा का महत्व कम होगा, बल्कि भविष्य की योजनाओं में भी छत्तीसगढ़ी भाषियों की उपेक्षा होगी।
उग्र आंदोलन की चेतावनी :
ज्ञापन सौंपने के दौरान छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना और जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी के पदाधिकारियों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यह छत्तीसगढ़िया स्वाभिमान का विषय है। यदि केंद्र सरकार छत्तीसगढ़ी भाषा की इस जायज मांग को पूरा नहीं करती है, तो आने वाले समय में प्रदेश स्तर पर उग्र आंदोलन किया जाएगा।इस अवसर पर छत्तीसगढ़िया क्रान्ति सेना के जिला संयोजक, अध्यक्ष , उपाध्यक्ष जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी के पदाधिकारी और बड़ी संख्या में महतारी भाखा प्रेमी उपस्थित रहे।
विनोद गुप्ता-आरंग



