गंगरेल का पानी बना वरदान-ये तालाब लबालब-निस्तारी और मवेशियों के लिए पानी की किल्लत से मिलेगा छुटकारा
आरंग।महानदी मुख्य नहर किनारे बसे अन्य गावो की तरह ग्राम रीवा में इन दिनों राहत और खुशी का माहौल साफ तौर पर देखा जा सकता है। गंगरेल बांध (रविशंकर सागर जलाशय) से निस्तारी के लिए छोड़े गए पानी ने कुकरा रोड स्थित सड़क किनारे के नैया तालाब को पूरी तरह लबालब भर दिया है। भीषण गर्मी की दस्तक के बीच तालाब में पानी का यह भराव किसी वरदान से कम नहीं है, जिससे गांव में मानो समय से पहले ही बरसात जैसा नजारा बन गया है।नहर के माध्यम से पहुंचे इस पानी ने वर्षों पुराने तालाब को नया जीवन दे दिया है। साफ-सुथरा जल, किनारों पर फैली हरियाली और शांत वातावरण ने नैया तालाब को बेहद मनमोहक बना दिया है। अब यह तालाब न केवल ग्रामीणों की जरूरतें पूरी कर रहा है, बल्कि राहगीरों और आसपास के लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र भी बन गया है।ग्रामीणों के अनुसार, लंबे समय बाद तालाब इस तरह लबालब भरा नजर आया है। गर्मी के दिनों में जहां पहले निस्तारी और मवेशियों के लिए पानी की भारी किल्लत रहती थी, वहीं अब इस समस्या से काफी हद तक निजात मिल गई है। तालाब में पर्याप्त पानी होने से दैनिक उपयोग के साथ-साथ पशुओं के लिए भी पानी की व्यवस्था सहज हो गई है। इसके अलावा, क्षेत्र के भूजल स्तर में सुधार की भी उम्मीद जताई जा रही है।इस जनहितैषी पहल के लिए ग्रामीणों ने सिंचाई विभाग (जल संसाधन विभाग) के प्रति आभार व्यक्त किया है। उनका कहना है कि विभाग द्वारा सही समय पर योजनाबद्ध तरीके से पानी छोड़े जाने के कारण ही आज यह तालाब पुनर्जीवित हो सका है। विभाग की सक्रियता और बेहतर जल प्रबंधन की सराहना करते हुए ग्रामीणों ने उम्मीद जताई है कि भविष्य में भी इसी तरह गांवों की आवश्यकताओं को प्राथमिकता दी जाती रहेगी।नैया तालाब की यह वर्तमान स्थिति न केवल प्राकृतिक सुंदरता का अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत कर रही है, बल्कि यह भी साबित कर रही है कि सुनियोजित प्रयासों से जल संसाधनों का बेहतर उपयोग कर ग्रामीण जीवन में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है।
विनोद गुप्ता-आरंग



