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    Home»Blog»महासमुंद जिले में निजी संस्था के प्रयास से पहला नेत्रदान, 61 वर्षीय महिला ने मृत्यु के बाद दी दो जिंदगियों को रोशनी
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    महासमुंद जिले में निजी संस्था के प्रयास से पहला नेत्रदान, 61 वर्षीय महिला ने मृत्यु के बाद दी दो जिंदगियों को रोशनी

    Rekhraaz SahuBy Rekhraaz SahuAugust 18, 202636 Views
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    महासमुंद जिले में निजी संस्था के प्रयास से पहला नेत्रदान, 61 वर्षीय महिला ने मृत्यु के बाद दी दो जिंदगियों को रोशनी

    महासमुंद। जिले में नेत्रदान को लेकर एक प्रेरणादायक पहल सामने आई है। निजी संस्था के प्रयास से महासमुंद जिले में पहली बार नेत्रदान प्राप्त हुआ है। ग्राम पीढ़ी निवासी 61 वर्षीय श्रीमती उत्तरा बाई चंद्राकर ने मृत्यु के बाद अपनी आंखें दान कर दो जरूरतमंद लोगों के जीवन में रोशनी लाने की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनके इस निर्णय को परिवार और समाज के लिए अनुकरणीय पहल माना जा रहा है।

    जानकारी के अनुसार, नेत्रदान की सूचना सिटी हॉस्पिटल, खरोरा (महासमुंद) के माध्यम से मिली। सूचना कर्ता डॉ. ऋतु बजाज रहीं। उत्तरा बाई चंद्राकर के पति देवकुमार चंद्राकर और पुत्र पंकज चंद्राकर ने इस पुनीत कार्य में सहमति और सहयोग दिया।

    नेत्रदान की प्रक्रिया चिकित्सकीय टीम की देखरेख में पूरी की गई। इस पहल के माध्यम से दिवंगत उत्तरा बाई की आंखें किसी जरूरतमंद व्यक्ति के जीवन में रोशनी का माध्यम बन सकेंगी। यही वजह है कि नेत्रदान को केवल दान नहीं, बल्कि मृत्यु के बाद भी किसी दूसरे व्यक्ति को नई जिंदगी और नई रोशनी देने वाला महादान माना जाता है।

    निजी संस्था के प्रयास से बनी मिसाल

    इस पूरे मामले की खास बात यह है कि महासमुंद जिले में निजी संस्था के प्रयास से प्राप्त यह पहला नेत्रदान बताया गया है। सिटी हॉस्पिटल, खरोरा की प्रेरणा एवं सूचना के माध्यम से यह पहल संभव हुई। इससे जिले में नेत्रदान के प्रति जागरूकता बढ़ने की उम्मीद है।

    नेत्रदान से जुड़ी इस पहल को स्वास्थ्य विभाग और चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े अधिकारियों ने भी महत्वपूर्ण माना है। नेत्रदान के लिए लोगों को आगे आने और अपने परिवार के सदस्यों को भी इसके महत्व के बारे में जागरूक करने की अपील की गई है।

    स्वास्थ्य विभाग और चिकित्सकीय टीम का मार्गदर्शन

    नेत्रदान की इस प्रक्रिया में स्वास्थ्य विभाग एवं चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों का सहयोग रहा। इसमें डॉ. आई. नागेश्वर राव, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, महासमुंद; डॉ. बसंत महेश्वरी, संयुक्त संचालक सह अस्पताल अधीक्षक, संबद्ध जिला चिकित्सालय एवं चिकित्सा महाविद्यालय महासमुंद; डॉ. अनिल गौरियार, जिला नोडल अधिकारी (NPCB&VI) एवं नेत्र सर्जन, जिला चिकित्सालय महासमुंद तथा डॉ. राजेश साहू, विभागाध्यक्ष (HOD), नेत्र विभाग, चिकित्सा महाविद्यालय महासमुंद का मार्गदर्शन रहा।

    इसके अलावा नेत्रदान की प्रक्रिया में श्री अवधेश यादव, सहायक नोडल अधिकारी NPCB&VI, श्री उमेश गोतमारे, वरिष्ठ जिला नेत्र सहायक अधिकारी, चिकित्सा महाविद्यालय महासमुंद तथा श्री निकुलाश जी, वरिष्ठ MLT, चिकित्सा महाविद्यालय महासमुंद का विशेष योगदान रहा। वाहन चालक श्री राजेश डर्सेना भी इस दौरान उपस्थित रहे।

    परिवार ने पेश की अनुकरणीय मिसाल

    उत्तरा बाई चंद्राकर के परिवार द्वारा मृत्यु के बाद नेत्रदान के लिए सहमति देना समाज के लिए महत्वपूर्ण संदेश है। परिवार ने दुख की घड़ी में भी यह निर्णय लेकर यह साबित किया कि किसी व्यक्ति के जाने के बाद भी उसका योगदान दूसरों के जीवन में उम्मीद और रोशनी बन सकता है।

    नेत्रदान से प्राप्त कॉर्निया जरूरतमंद मरीजों के उपचार में उपयोगी हो सकती है और किसी ऐसे व्यक्ति को दृष्टि प्राप्त करने में मदद मिल सकती है, जो लंबे समय से आंखों की रोशनी की समस्या से जूझ रहा हो।

    ‘नेत्रदान करें, जीवनदान दें’

    स्वास्थ्य विभाग और चिकित्सा विशेषज्ञों की ओर से लोगों से अपील की गई है कि वे नेत्रदान के महत्व को समझें और इसके लिए संकल्प लें। एक व्यक्ति के नेत्रदान से दो जरूरतमंद लोगों को दृष्टि मिलने की संभावना होती है। इसलिए नेत्रदान को मृत्यु के बाद भी समाज के लिए योगदान देने का सबसे बड़ा माध्यम माना जाता है।

    उत्तरा बाई चंद्राकर का नेत्रदान महासमुंद जिले में एक नई शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है। यह पहल न केवल उनके परिवार बल्कि पूरे जिले के लोगों को नेत्रदान के लिए प्रेरित करने वाली है। यदि अधिक से अधिक लोग नेत्रदान का संकल्प लें, तो अनेक दृष्टिबाधित लोगों के जीवन में रोशनी लौटाई जा सकती है।

    संदेश: नेत्रदान करें, जीवनदान दें। आंखें रहेंगी तो दुनिया रोशन रहेगी।

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    Rekhraaz Sahu

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