गणेश प्रतिमाओं को फाइनल टच-रंगों से जीवंत हो रहे बप्पा
आरंग।गणेश चतुर्थी के एक दिन पहले गणेश प्रतिमाओं को अंतिम रूप देने का काम युद्धस्तर पर चल रहा है। मूर्तिकार दिन-रात मेहनत कर प्रतिमाओं के रंग-रोगन, साज-सज्जा और बारीकियों को अंतिम रूप देने में जुटे हैं। मिट्टी और आकार ले चुकी प्रतिमाएं अब रंगों से सजकर गणपति बप्पा के मनोहारी स्वरूप में नजर आने लगी हैं।इसी कड़ी में लखौली क्षेत्र के प्रसिद्ध मूर्तिकार एवं ग्राम नारा निवासी नारायण धीवर भी गणेश प्रतिमाओं को अंतिम रूप देने में जुटे हुए हैं। करीब 40 वर्षों से गणेश सहित विभिन्न देवी-देवताओं की प्रतिमाएं बनाने का काम कर रहे नारायण इस वर्ष मिले करीब 55 प्रतिमाओं के ऑर्डर को पूरा करने में लगे हैं। गणेश चतुर्थी नजदीक आने के साथ उनके कार्यस्थल पर दिन-रात चहल-पहल बनी हुई है।नारायण धीवर द्वारा इस वर्ष अलग-अलग आकार और बजट की गणेश प्रतिमाएं तैयार की जा रही हैं। यहां सबसे छोटी प्रतिमा की कीमत करीब 5 हजार रुपए, जबकि बड़ी और आकर्षक प्रतिमाओं की कीमत करीब 40 हजार रुपए तक है। श्रद्धालुओं और गणेशोत्सव समितियों की पसंद के अनुसार प्रतिमाओं के आकार, स्वरूप और सजावट में विविधता रखी गई है।प्रतिमा निर्माण का यह काम अकेले संभव नहीं है। नारायण धीवर अपनी पत्नी और पुत्र के साथ एक दर्जन से अधिक कारीगरों को साथ लेकर प्रतिमाओं को अंतिम रूप देने में जुटे हैं। कोई रंग-रोगन कर रहा है तो कोई मुकुट, आभूषण और अन्य सजावटी हिस्सों को तैयार करने में लगा है। प्रतिमाओं की आंखों और चेहरे की बारीक सजावट का काम सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है, जिसे कुशलता से पूरा किया जा रहा है।करीब चार दशक से मूर्ति निर्माण से जुड़े नारायण धीवर ने अपने हुनर को पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ाया है। उनके लिए यह केवल रोजी-रोटी का काम नहीं, बल्कि आस्था, कला और परंपरा से जुड़ा हुनर भी है। गणेश चतुर्थी से पहले प्रतिमाओं को अंतिम रूप देने के दौरान उनके कार्यस्थल पर भक्ति और मेहनत का अनूठा संगम दिखाई दे रहा है।14 सितंबर को गणेश चतुर्थी के साथ ही घरों और सार्वजनिक पंडालों में गणपति बप्पा की स्थापना होगी। इसके लिए समितियों और श्रद्धालुओं द्वारा प्रतिमाएं ले जाने का सिलसिला भी शुरू हो जाएगा। मूर्तिकारों की महीनों की मेहनत के बाद तैयार गणेश प्रतिमाएं अब श्रद्धालुओं के घर और पंडालों की शोभा बढ़ाने के लिए तैयार हैं।
विनोद गुप्ता-आरंग



