डॉ शिवकुमार डहरिया ने NIA जांच पर उठाए सवाल-13 साल बाद 10 आरोपी दोषी-क्या पूरी साजिश का हुआ पर्दाफाश..?
आरंग।छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित झीरम घाटी हत्याकांड में NIA की विशेष अदालत के फैसले के बाद प्रदेश की सियासत फिर गरमा गई है। 13 साल पुराने मामले में अदालत ने बचे सभी 10 आरोपियों को दोषी करार दिया है। अदालत के फैसले को जहां न्याय की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, वहीं पूर्व कैबिनेट मंत्री डॉ. शिवकुमार डहरिया ने NIA की जांच और मामले में अदालत तक पहुंचे आरोपियों को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।डहरिया का सवाल है कि क्या झीरम घाटी हत्याकांड में केवल हमले में शामिल आरोपियों को दोषी ठहराना ही पूरी सच्चाई सामने आने के बराबर है, या इस राजनीतिक नरसंहार के पीछे छिपी पूरी साजिश का पर्दाफाश होना अभी बाकी है?25 मई 2013 को झीरम घाटी में कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा के काफिले पर हुए नक्सली हमले में तत्कालीन प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नंदकुमार पटेल, वरिष्ठ नेता महेंद्र कर्मा, पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल सहित कई नेता, कार्यकर्ता और सुरक्षाकर्मी मारे गए थे। घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया था।घटना की जांच बाद में NIA ने अपने हाथ में ली। वर्षों चली जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद अब 10 आरोपियों की दोषसिद्धि हुई है।लेकिन डॉ. डहरिया ने जांच की दिशा पर सवाल उठाते हुए यह मुद्दा फिर सामने ला दिया है कि इतने बड़े राजनीतिक नरसंहार के पीछे केवल हमलावरों की भूमिका तक जांच सीमित रही या इसके पीछे किसी बड़े षड्यंत्र, सूचना तंत्र और मददगारों की भूमिका की भी तह तक पहुंचा गया?झीरम घाटी कांड को लेकर छत्तीसगढ़ में वर्षों से यह सवाल राजनीतिक बहस का हिस्सा रहा है कि घटना को केवल नक्सली हमला मानकर जांच पूरी मानी जाए या इसके पीछे संभावित व्यापक साजिश की हर कड़ी को भी जांच के दायरे में लाया जाए।डॉ. डहरिया के सवालों ने इसी पुराने मुद्दे को एक बार फिर हवा दे दी है। उनका कहना है कि झीरम के शहीदों को वास्तविक न्याय तभी माना जाएगा, जब हमले के पीछे की पूरी सच्चाई सामने आए और साजिश की अंतिम कड़ी तक जांच पहुंचे। 13 साल बाद आया फैसला निश्चित रूप से झीरम मामले की न्यायिक प्रक्रिया में महत्वपूर्ण पड़ाव है। दोषियों की जिम्मेदारी तय होने से पीड़ित परिवारों को न्याय की उम्मीद मजबूत हुई है। मगर राजनीतिक तौर पर अब सवाल यह है कि क्या यह फैसला झीरम की पूरी कहानी का अंत है, या अभी उन सवालों के जवाब बाकी हैं जो घटना के पीछे की साजिश को लेकर लगातार उठते रहे हैं?झीरम घाटी का जख्म छत्तीसगढ़ की राजनीति में आज भी गहरा है। अदालत के फैसले के बाद डॉ. डहरिया के सवालों ने एक बार फिर सरकार और जांच एजेंसी के सामने यही चुनौती खड़ी कर दी है कि दोषियों तक पहुंचने के बाद क्या अब झीरम की पूरी साजिश का सच भी सामने आएगा?
विनोद गुप्ता-आरंग



