सिंचाई नहरों में पानी रोककर मछली पकड़ने वाले शरारती तत्वों पर रोक लगाने की मांग, किसानों में आक्रोश
आरंग।वितरक शाखाओं और माइनरों के माध्यम से इन दिनों खरीफ धान की फसल को बांधों से अनवरत सिंचाई पानी दिया जा रहा है, लेकिन सतत चौकसी के लिए पर्याप्त विभागीय मैदानी अमला न होने के कारण इसका फायदा मछली पकड़ने वाले शरारती तत्व उठा रहे हैं। खासकर रात के समय में ये लोग पानी के प्रवाह को अवरूद्ध कर मछली पकड़ते हैं, जिससे पानी का प्रवाह बाधित होता है। प्रवाह टूटने के बाद फिर से नए सिरे से पानी की धार लगानी पड़ती है, जिसके चलते किसानों में भारी आक्रोश व्याप्त है। किसानों की इस गंभीर समस्या की शिकायत पर रायपुर जिला जल उपभोक्ता संस्था संघ के पूर्व अध्यक्ष भूपेंद्र शर्मा, सिंचाई पंचायत के पूर्व अध्यक्ष हिरेश चंद्राकर, थानसिंह साहू, गोविंद चंद्राकर, धनीराम साहू, प्रहलाद चंद्राकर, भारतेन्दु साहू, मनमोहन गुप्ता, चिंताराम वर्मा, तुलाराम चंद्राकर और योगेश चंद्राकार आदि ने महानदी जलाशय परियोजना के अधीक्षण अभियंता एस.के. साहू, जल प्रबंध संभाग क्रमांक 01 के कार्यपालन अभियंता ललित रावटे तथा बंगोली सिंचाई उपसंभाग के अनुविभागीय अधिकारी विनोद कुमार बहादुर को पूरी जानकारी भेजी है। उन्होंने नहरों के पानी के प्रवाह को अवैधानिक रूप से अवरूद्ध करने पर रोक लगाने और ऐसे शरारती तत्वों पर सख्त कार्रवाई करने की माँग की है।
किसानों और प्रतिनिधियों ने अधिकारियों का ध्यान इस ओर भी आकृष्ट कराया है कि पूर्व में जब सिंचाई पंचायतें अस्तित्व में थीं, तब इन माइनरों व वितरक शाखाओं में मछली पकड़ने के अधिकारों के साथ-साथ महानदी मुख्य नहर के किनारों की नीलामी की जाती थी। इनके माध्यम से नहर प्रणाली में सिंचाई जारी रहने तक दिन-रात चौकसी की जाती थी, जिससे विघ्नसंतोषी तत्व अपने मंसूबों में कामयाब नहीं हो पाते थे।
किसानों ने मांग की है कि इस पर रोक लगाने के लिए या तो पर्याप्त अमला तैनात किया जाए अथवा इस खरीफ सिंचाई सीजन में फिलहाल सिंचाई पंचायत मुख्यालय वाले ग्रामों को इसकी व्यवस्था सौंप दी जाए। आवश्यकता पड़ने पर इसके लिए निर्देश या परिपत्र जारी कराने की बात कही गई है, ताकि सिंचाई पानी के प्रवाह में किसी प्रकार की बाधा उत्पन्न न हो और किसानों की फसल को समय पर पूरा पानी मिल सके।
विनोद गुप्ता-आरंग



