जनपद पंचायत अध्यक्ष की लगातार उपेक्षा-राजनीतिक दुर्भावना या कुछ और….?
कवर्धा। सहकारिता विभाग द्वारा 6 जुलाई को शासकीय पीजी कॉलेज ग्राउंड, कवर्धा में आयोजित जिला स्तरीय कृषक संगोष्ठी कार्यक्रम के आमंत्रण पत्र को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं। आमंत्रण पत्र में सांसद, विधायक, जिला पंचायत अध्यक्ष, नगर पालिका अध्यक्ष, जिला पंचायत उपाध्यक्ष सहित कई जनप्रतिनिधियों के नाम शामिल किए गए हैं, लेकिन जनपद पंचायत कवर्धा के अध्यक्ष का नाम नहीं होने से सवाल खड़े हो रहे हैं।स्थानीय जनप्रतिनिधियों और क्षेत्र के लोगों का कहना है कि यह पहली बार नहीं है, बल्कि कई सरकारी कार्यक्रमों में भी जनपद पंचायत अध्यक्ष की अनदेखी की जाती रही है। इसे लेकर यह चर्चा भी हो रही है कि क्या यह आरक्षित वर्ग से होने के कारण उपेक्षा है या फिर राजनीतिक दुर्भावना का परिणाम?जनप्रतिनिधियों का कहना है कि जनपद पंचायत अध्यक्ष ग्रामीण विकास व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा होते हैं। ऐसे में जिला स्तरीय सरकारी कार्यक्रमों से उन्हें बार-बार दूर रखना न केवल उनकी गरिमा को प्रभावित करता है, बल्कि उनके पद का भी अनादर माना जा सकता है।अब लोगों की निगाहें सहकारिता विभाग और जिला प्रशासन पर हैं कि इस विषय में क्या स्पष्टीकरण दिया जाता है और भविष्य में ऐसी स्थिति की पुनरावृत्ति रोकने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।

विनोद गुप्ता-आरंग



