आरंग में प्रशासनिक दावों की खुली पोल-गणेश विसर्जन के दौरान नियमों को ताक पर रखकर गूंजते रहे तेज आवाज वाले डीजे
आरंग।प्रशासनिक सख्ती और कागजी दावों के बीच आरंग में गणेश विसर्जन के दौरान सुप्रीम कोर्ट के आदेशों और ध्वनि प्रदूषण के नियमों की जमकर धज्जियां उड़ाई गईं। शांति समिति की बैठकों में तय की गई ध्वनि सीमा और रात्रि प्रतिबंध केवल कागजों तक ही सीमित नजर आए, जिससे आम जनता को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा।विसर्जन से पहले हुई शांति समिति की बैठक में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप डीजे संचालन पर सहमति बनी थी, लेकिन धरातल पर इसका पालन कराने में प्रशासन पूरी तरह नाकामयाब रहा। गणेश विसर्जन के दौरान आरंग में 100 से 120 डेसिबल की खतरनाक आवाज में बेखौफ डीजे और धुमाल बजाए जाते रहे और जिम्मेदार प्रशासनिक अमला आंखें मूंदकर बैठा रहा।चिकित्सकों के अनुसार, 100-120 डेसिबल का यह तेज शोर मरीजों, बुजुर्गों और छोटे बच्चों के लिए जी का जंजाल बन गया, जिससे दिल का दौरा पड़ने और गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है। त्योहारों पर नियमों के उल्लंघन और कार्रवाई न होने के कारण स्थानीय नागरिकों में भारी निराशा और आक्रोश है, और लोग प्रशासनिक व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहे हैं।
विनोद गुप्ता-आरंग



