मैदानी इलाकों के गौ पालकों को नहीं मिल रही सब्सिडी-नकली दूध-पनीर के कारोबार पर इन्होंने जताई चिंता
आरंग।मैदानी क्षेत्रों में गौपालन करने वाले पशुपालकों को सब्सिडी का पर्याप्त लाभ नहीं मिलने से उनके सामने गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। इस ज्वलंत मुद्दे पर जिला पंचायत सदस्य वतन चन्द्राकर ने तीखे सवाल खड़े करते हुए शासन-प्रशासन से नीतिगत सुधार की मांग की है। उन्होंने कहा है कि एक तरफ पशुपालक चारे, रखरखाव और उपचार के बढ़ते खर्चों से जूझ रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ मैदानी इलाकों के गौपालकों की उपेक्षा से स्थानीय स्तर पर शुद्ध दूध की उपलब्धता प्रभावित हो रही है।जिला पंचायत सदस्य वतन चन्द्राकर ने चिंता जताई कि दूध की मांग और आपूर्ति के बीच के अंतर का फायदा उठाकर बाजार में नकली दूध, पनीर और खोवा बड़े पैमाने पर खपाए जा रहे हैं, जो आम जनता के स्वास्थ्य के साथ सीधा खिलवाड़ है। उन्होंने मांग की है कि शासन की योजनाओं और अनुदान का लाभ देने में किसी भी प्रकार का क्षेत्रीय भेदभाव नहीं होना चाहिए, ताकि पात्र पशुपालकों को संबल मिल सके।वतन चन्द्राकर ने खाद्य सुरक्षा विभाग को आड़े हाथों लेते हुए मांग की है कि दूध और दुग्ध उत्पादों की गुणवत्ता की नियमित जांच की जाए। संदिग्ध उत्पादों के नमूने लेकर प्रयोगशाला में परीक्षण कराए जाएं और मिलावट की पुष्टि होने पर संबंधित कारोबारियों के खिलाफ कठोर से कठोर कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि स्थानीय दूध उत्पादन को बढ़ावा देने, गौपालकों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने और मिलावटखोरों पर नकेल कसने के लिए समन्वित नीति अपनाए जाने की सख्त जरूरत है।
विनोद गुप्ता-आरंग



