सैकड़ों शिक्षकों ने तूता धरना स्थल पर पुरानी पेंशन और टेट मुक्ति के लिए किया सत्याग्रह
आरंग।। गाँधी जयंती (2 अक्टूबर) के अवसर पर राजधानी रायपुर के तूता धरना स्थल पर प्रदेश शिक्षक कल्याण संघ के बैनर तले एक दिवसीय ऐतिहासिक पेंशन सत्याग्रह का आयोजन किया गया। इस सत्याग्रह में प्रदेश के कोने-कोने से हजारों शिक्षक शामिल हुए, जिनमें विकासखण्ड आरंग से भी सैकड़ों शिक्षक प्रमुख रूप से मौजूद रहे। शिक्षकों ने प्रथम सेवा गणना कर पुरानी पेंशन बहाली और टेट की अनिवार्यता से मुक्ति दिलाने की पुरजोर माँग की। इस आंदोलन में आरंग क्षेत्र से कई प्रमुख शिक्षक और पदाधिकारी शामिल हुए। उपस्थित प्रमुख लोगों में वक्ता पं. छत्रधर दीवान, अध्यक्ष जग्गुराम साहू, हरीश दीवान, जितेंद्र शुक्ला, शिक्षक कल्याण संघ जिलाध्यक्ष कुम्भज सोनवानी, टीकाराम साहू, युवराम साहू, मनीराम साहू, नरेश कोसले, हेमलाल वर्मा, श्रवण डहरिया, गंगा प्रसाद सेन, आत्माराम निषाद, दिलीप चंद्राकर, खेदूराम चंद्राकर, लीलाधर साहू, ठाकुर राम साहू तथा हेमंत साहू सहित सैकड़ों शिक्षक बड़ी संख्या में सत्याग्रह स्थल पर डटे रहे।प्रदर्शन के दौरान शिक्षकों ने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा कि पेंशन सेवानिवृत्त कर्मचारियों के लिए बुढ़ापे की लाठी के समान होती है। किंतु शासन द्वारा शिक्षकों की पूर्व सेवा को शून्य घोषित कर संविलयन तिथि (1 जुलाई 2018) को आधार मानकर पेंशन दी जा रही है, जो ‘ऊँट के मुँह में जीरा’ साबित हो रही है। वर्तमान महंगाई के दौर में सेवानिवृत्त शिक्षकों को मिल रही मात्र 2500 से 2700 रुपये की पेंशन राशि से परिवार का भरण-पोषण और एक सम्मानजनक जीवन जीना असंभव हो गया है। वृद्धावस्था में गंभीर बीमारियाँ घेर लेती हैं, और महंगी चिकित्सा के आभाव तथा समय पर इलाज न मिलने के कारण कई सेवानिवृत्त कर्मचारी असमय काल के गाल में समा रहे हैं।प्रदेश शिक्षक कल्याण संघ ने गांधीवादी मार्ग अपनाते हुए संवाद के जरिए तहसीलदार के माध्यम से राज्य शासन को अपनी इन मूलभूत समस्याओं और मांगों का ज्ञापन सौंपा है। संघ ने कड़े शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि शासन द्वारा इन न्यायसंगत मांगों पर जल्द ही कोई सकारात्मक निर्णय नहीं लिया जाता है, तो शिक्षक कल्याण संघ उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होगा, जिसकी संपूर्ण जवाबदारी शासन-प्रशासन की होगी।
विनोद गुप्ता-आरंग



