अतिरिक्त संपत्ति कर व अधिभार की वसूली के नोटिस का विरोध। नगरपालिका की मनमानी के खिलाफ पार्षदों ने उठाई आवाज, नोटिस पर तत्काल रोक की मांग

महासमुन्द। नगर पालिका महासमुन्द द्वारा शहरवासियों को वित्तीय वर्ष 2025-26 में पूर्व में जमा किए जा चुके संपत्ति कर के अतिरिक्त संपत्ति कर एवं अधिभार की राशि जमा करने संबंधी नोटिस जारी किए जाने का नगर पालिका उपाध्यक्ष देवीचंद राठी, पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष पवन पटेल, प्रतिपक्ष नेता नानू भाई, पार्षदगण सुनैना, पप्पू ठाकुर, सीता डोंडेकर, जरीना हफीज कुरैशी, माखन पटेल, कल्पना सूर्यवंशी, माधुरी घनीराम यदु, जसप्रीत प्रीति बादल मक्कड़, निश्चय पूनम चंद्राकर, चंद्रशेखर बेलदार, भारती राजेन्द्र चंद्राकर, भाऊराम साहू, पीयूष अमृत साहू, शुभ्रा मनीष शर्मा, धनेश्वरी सोनाधर सोनवानी, एल्डरमेन हनीश बग्गा, प्रभा साहू, मधु यादव, लालविजय प्रताप सिंह देव, मोहन साहू, सांसद प्रतिनिधि महेन्द्र जैन एवं विधायक प्रतिनिधि हफीज कुरैशी ने विरोध किया है।
नगर पालिका उपाध्यक्ष देवीचंद राठी ने कहा कि नगर पालिका द्वारा स्व-निर्धारण एवं कर्मचारियों द्वारा किए गए आकलन के आधार पर वर्षों से संपत्ति कर की वसूली की जाती रही है। ऐसे में कांग्रेस शासित नगर पालिका मेंअचानक पुराने वित्तीय वर्ष का अतिरिक्त संपत्ति कर एवं अधिभार वसूलने के लिए नोटिस जारी करना शहर की जनता के साथ अन्याय है। बिना पी.आई.सी. एवं परिषद के निर्णय के पुराने वित्तीय वर्ष पर अतिरिक्त कर का भार डालना उचित नहीं है। नगरपालिका अध्यक्ष की मनमानी नही चलेगी
श्री राठी ने बताया कि नगर पालिका से जानकारी लेने पर उन्हें बताया गया कि संपत्ति कर का निर्धारण वर्ष 2015-16 की दरों के आधार पर किया जा रहा है। शहर के मकानों के बाहर लगाए गए स्कैनर के आधार पर पूर्व में लिए जा रहे टैक्स से अधिक राशि निर्धारित की गई है और अब उसी अंतर की मांग की जा रही है।
उन्होंने कहा कि यदि संपत्ति कर का पुनर्निर्धारण करना है तो सबसे पहले नगर पालिका द्वारा लगाए गए सभी स्कैनरों को अपडेट किया जाना चाहिए। वर्तमान में कई स्कैनरों में मकान मालिक के नाम के स्थान पर दूसरे व्यक्तियों के नाम दर्ज हैं। ऐसी स्थिति में स्कैनर के आधार पर अतिरिक्त कर की वसूली करना उचित नहीं है।
राठी ने कहा कि स्कैनरों को पूरी तरह अपडेट करने में लंबा समय लग सकता है। इसलिए आगामी वित्तीय वर्ष से ही पी.आई.सी. एवं नगर पालिका परिषद के विधिवत अनुमोदन के बाद संशोधित कर लागू किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रदेश के अन्य नगरीय निकायों में भी पूर्व में जमा किए जा चुके संपत्ति कर पर इस प्रकार अतिरिक्त कर एवं अधिभार की वसूली नहीं की जा रही है। फिर महासमुन्द नगर पालिका द्वारा पुराने वित्तीय वर्ष के लिए अतिरिक्त राशि की मांग क्यों की जा रही है, यह समझ से परे है।
उन्होंने मांग की कि अतिरिक्त संपत्ति कर एवं अधिभार संबंधी नोटिस पर तत्काल रोक लगाई जाए। पहले नगर पालिका के सभी स्कैनरों को अपडेट किया जाए तथा स्कैनर में दर्ज मकानों की स्थिति एवं माप का मोहर्रिर द्वारा पुनः सत्यापन कराया जाए अथवा पुराने स्वीकृत नाप के आधार पर रिकॉर्ड को अपडेट किया जाए।
