रसनी के बाद अब लखौली में भी औद्योगिक अधिग्रहण की आहट-भड़का किसानों में आक्रोश-तहसीलदार को सौंपा ज्ञापन
आरंग। तहसील आरंग के अंतर्गत आने वाले ग्राम लखौली में 35 खसरों की कुल 11.44 हेक्टेयर उपजाऊ निजी कृषि भूमि को औद्योगिक प्रयोजन के लिए अधिग्रहित करने की प्रशासनिक सुगबुगाहट तेज होते ही ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा है।प्रशासन द्वारा जारी इश्तहार के सामने आते ही अपनी जमीनों के अस्तित्व पर मंडराते संकट को देखते हुए किसानों ने एकजुट होकर मोर्चा खोल दिया है। ग्राम पंचायत लखौली के सरपंच हिरामन साहू की अगुवाई में बड़ी संख्या में प्रभावित कास्तकार तहसील कार्यालय पहुंचे और अधिग्रहण की प्रक्रिया को तत्काल प्रभाव से समाप्त करने की मांग करते हुए तहसीलदार को कड़ा आपत्ति-ज्ञापन सौंपा।प्रशासनिक इश्तहार के अनुसार ग्राम लखौली, पटवारी हल्का नंबर 33, राजस्व निरीक्षक मंडल भिलाई स्थित खसरा नंबर 159/1, 159/2, 177/1, 159/3, 177/2, 159/4, 177/3, 160, 177/4, 178, 179, 184/2, 180, 181, 182, 573/1, 573/2, 183/1, 183/2, 184/1, 185, 569, 570/1 से 570/5, 572/1, 572/2, 572/3, 573/3, 575, 576, 577 एवं 578 सहित कुल 35 खसरों की 11.44 हेक्टेयर निजी भूमि को औद्योगिक प्रयोजन के लिए अर्जन करने का प्रस्ताव है।यह पूरी कार्रवाई राज्य निवेश प्रोत्साहन बोर्ड के पत्र, जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्र रायपुर की अनुशंसा तथा वाणिज्य एवं उद्योग विभाग द्वारा भूमि अर्जन, पुनर्वासन और पुनर्व्यवस्थापन में उचित प्रतिकर एवं पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम, 2013 के तहत दी गई सशर्त सैद्धांतिक सहमति के आधार पर आगे बढ़ाई जा रही है। तहसीलदार न्यायालय ने इस मामले में 18 अगस्त 2026 तक दावा-आपत्ति प्रस्तुत करने का समय निर्धारित किया है।सौंपे गए ज्ञापन में किसानों ने अधिग्रहण का विरोध करते हुए प्रमुख रूप से अपनी आजीविका और पर्यावरण की सुरक्षा की बात कही है। कास्तकारों का स्पष्ट कहना है कि इन खसरों की भूमि पूरी तरह उपजाऊ कृषि भूमि है, जो उनके परिवारों के भरण-पोषण का एकमात्र जरिया है। जमीन छिन जाने से उनके सामने रोजी-रोटी का गंभीर संकट खड़ा हो जाएगा और आर्थिक रीढ़ टूट जाएगी। इसके अलावा, शांत ग्रामीण अंचल में उद्योगों की स्थापना से प्रदूषण फैलने, पर्यावरण को नुकसान पहुंचने और गांव की सामाजिक शांति व्यवस्था प्रभावित होने की पूरी आशंका है। किसानों ने दो टूक शब्दों में प्रशासन से कहा है कि उन्हें अपनी कृषि भूमि का अधिग्रहण किसी भी सूरत में मंजूर नहीं है, इसलिए जनहित में इस प्रक्रिया को तुरंत निरस्त किया जाए।
विनोद गुप्ता-आरंग



