राजा मोरध्वज की नगरी आरंग में ऐतिहासिक धरोहर मिलने का सिलसिला जारी-111 वर्ष पुरानी हस्तलिखित ‘दुर्गासप्तशती’ सहित कई मिली दुर्लभ पांडुलिपियां
आरंग। ऐतिहासिक और पौराणिक नगरी आरंग में ज्ञानभारतम मिशन के अंतर्गत प्राचीन और दुर्लभ पांडुलिपियों के मिलने का सिलसिला लगातार जारी है। इसी कड़ी में आरंग के ब्राह्मण पारा स्थित आचार्य पं.अजीत कमलनारायण शर्मा (ज्योतिषाचार्य) के निवास से सदियों पुरानी और अत्यंत दुर्लभ हस्तलिखित पांडुलिपि व पोथियां प्राप्त हुई हैं। इनमें 111 वर्ष पुरानी हस्तलिखित बीजात्मक दुर्गासप्तशती और 98 वर्ष पुराना कपिला तर्पण मुख्य रूप से शामिल हैं।इस महत्वपूर्ण खोज की सूचना मिलते ही जिला कलेक्टर रायपुर डॉ. गौरव कुमार सिंह के मार्गदर्शन में एक उच्च स्तरीय सर्वेक्षण टीम ने आचार्य के निवास पहुंचकर इन अमूल्य धरोहरों का बारीकी से अवलोकन किया।सर्वेक्षण में पता चला है कि ये दुर्लभ पांडुलिपियां आचार्य अजीत कमलनारायण शर्मा (ज्योतिषाचार्य) के परिवार में पीढ़ियों से सहेज कर रखी गई थीं। यह ज्ञान का खजाना पिता कमलनारायण शर्मा, दादा नंद कुमार पौराणिक और परदादा भागवताचार्य बाल मुकुंद पौराणिक(राधेश्याम रामायण के प्रखर वक्ता) के समय का है, जिसे परिवार ने आज भी जीवंत रखा है। साथ ही 75 वर्ष पुरानी हस्तलिखित सर्व देव पूजन विधि,प्राचीन विवाह संस्कार एवं दुर्लभ 160 वर्ष पुरानी पोथियां श्रीमद्भागवत रहस्य,षोडश संस्कार,ज्योतिष जतक भरण , चंडी रहस्य आदि भी प्राप्त हुवे।इस ऐतिहासिक खोज का निरीक्षण करने पहुंचे मुख्य नगर पालिका अधिकारी शीतल चंद्रवंशी, विकासखंड शिक्षा अधिकारी दिनेश शर्मा और विकासखंड स्त्रोत समन्वयक सुरेंद्र सिंह चंद्रसेन ने इन प्राचीन धरोहरों के संरक्षण पर आचार्य अजीत शर्मा को बधाई दी और इसे क्षेत्र के लिए एक बड़ा गौरव बताया।इस महत्वपूर्ण खोज और सर्वेक्षण कार्य में नवाचारी शिक्षक अरविंद वैष्णव व महेंद्र पटेल, अजय ध्रुव के साथ-साथ पार्षद प्रतिनिधि राकेश शर्मा, व्याख्याता माणिक लाल मिश्रा और संकुल समन्वयक हरीश दीवान, विकास सिंह ने अपनी सक्रिय सहभागिता निभाई।
विनोद गुप्ता-आरंग



