सिंचाई व्यवस्था पर जनगणना का साया-मैदानी अमले को ड्यूटी से मुक्त करने की उठी मांग
आरंग।जल संसाधन विभाग में मैदानी अमले की भारी कमी के बीच अब एक नया संकट खड़ा हो गया है। भीषण गर्मी में गांवों की निस्तारी व्यवस्था संभालने और आगामी खरीफ सिंचाई की तैयारियों के ऐन वक्त पर विभाग के तकनीकी अमले को जनगणना ड्यूटी में लगा दिया गया है। रायपुर जिला जल उपभोक्ता संस्था संघ के पूर्व अध्यक्ष भूपेंद्र शर्मा ने इस ओर शासन-प्रशासन का ध्यान आकृष्ट कराते हुए मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव को ज्ञापन सौंपकर अमले को इस अतिरिक्त कार्य से मुक्त करने की पुरजोर मांग की है।मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, मुख्य सचिव विकासशील और मुख्यमंत्री सचिवालय के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह को ईमेल के माध्यम से प्रेषित ज्ञापन में बताया गया है कि दो चरणों में होने वाली ‘जनगणना-2027’ के प्रथम चरण का प्रशिक्षण कार्य शुरू हो चुका है। इसमें जल संसाधन विभाग के उप-अभियंताओं, सहायक अभियंताओं और टाइमकीपरों की ड्यूटी लगा दी गई है, जिससे मैदानी स्तर पर कामकाज प्रभावित हो रहा है। शर्मा ने आशंका जताई है कि देर-सबेर अमीनों को भी इस कार्य में झोंका जा सकता है, जो सिंचाई व्यवस्था के लिए घातक सिद्ध होगा।ज्ञापन में इस बात पर विशेष जोर दिया गया है कि वर्तमान में बांधों से तालाबों को भरने के लिए पानी छोड़ा जा रहा है और नहरों, वितरक शाखाओं व माइनरों में पानी का प्रवाह जारी है। ऐसे नाजुक समय में यदि मैदानी अमला प्रशिक्षण और जनगणना कार्य में व्यस्त रहेगा, तो नहर प्रणाली की देखरेख और आगामी खरीफ सीजन के लिए साफ-सफाई व रखरखाव की व्यवस्था पूरी तरह लड़खड़ा जाएगी।भूपेंद्र शर्मा ने शासन से आग्रह किया है कि कृषि और ग्रामीण निस्तारी की संवेदनशीलता को देखते हुए जल संसाधन विभाग के इस सीमित अमले को जनगणना कार्य से मुक्त रखा जाए। उन्होंने ज्ञापन में विभाग में कर्मचारियों की पहले से मौजूद अत्यधिक कमी का भी हवाला दिया है और मांग की है कि सिंचाई प्रबंधन के व्यापक हित में इस पर सहानुभूतिपूर्वक विचार किया जाए।
विनोद गुप्ता-आरंग



