धारा 138 परक्राम्य लिखत अधिनियम के 42 प्रकरणों का निराकरण, हुए एक करोड़ 81 लाख 87 हजार 947 रूपए अवार्ड पारित

महासमुंद दिनांक 18 जुलाई 2026/छत्तीसगढ़ राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण बिलासपुर के निर्देशानुसार धारा 138 परक्राम्य लिखत अधिनियम के मामलो से संबंधित विशेष लोक अदालत का आयोजन किया गया। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, महासमुंद के प्रभारी सचिव एवं मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट सुश्री चेतना ठाकुर द्वारा जानकारी दी गई कि परक्राम्य लिखत अधिनियम अर्थात चेक अनादर व चेक बाउसिंग संबंधित बढ़ती लंबित मामलों के निराकरण करने के उद्देश्य से आज 18 जुलाई 2026 को प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्रीमती अनिता डहरिया के मार्गदर्शन पर जिला मुख्यालय एवं तालुका स्थित न्यायालयों सहित कुल 10 खंडपीठों का गठन कर तथा प्रत्येक खंडपीठ में एक-एक सुलहकर्ता सदस्यों की नियुक्ति कर धारा 138 परक्राम्य लिखत अधिनियम के तहत संस्थित मामलों का सुलह एवं समझौते के आधार पर निराकरण किया गया। इस प्रकार चेक अनादर व चेक बाउसिंग पर अधारित आज आयोजित विशेष लोक अदालत में कुल 42 प्रकरणों का निराकरण करते हुए एक करोड़ 81 लाख 87 हजार 947 रूपए का अवार्ड पारित किया गया है। उल्लेखनीय है कि माननीय छत्तीसगढ़ राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण बिलासपुर द्वारा जारी निर्देशानुसार आज 18 जुलाई 2026 को छत्तीसगढ़ राज्य के समुचे जिला एवं तालुका स्थित न्यायालयों में विशेष लोक अदालत का आयोजन किया है जो मुख्यतः धारा 138 परक्राम्य लिखत अधिनियम के मामले रखे गए थे। यह धारा चेक के अनादृत या बाउंस होने की स्थिति में आपराधिक दायित्व निर्धारित करती है। अधिनियम की धारा 138 में यह प्रावधान है कि यदि कोई चेक किसी व्यक्ति (चेक जारीकर्ता) द्वारा किसी अन्य व्यक्ति (प्राप्तकर्ता) के पक्ष में जारी किया जाता है और चेक जारीकर्ता के बैंक खाते में अपर्याप्त धनराशि के कारण अनादृत हो जाता है, तो ऐसे जारीकर्ता को अपराध का दोषी माना जाता है। इस अपराध के लिए दंड और चेक की राशि के दोगुने तक का जुर्माना हो सकता है।
