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    Home»Blog»बड़ी खबर-सरकार से नहीं हुआ समझौता-सहकारी समिति के कर्मचारियों की हड़ताल जारी-15 नवम्बर से प्रस्तावित धान खरीदी पर संकट के बादल-बढ़ी किसानों की चिंता
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    बड़ी खबर-सरकार से नहीं हुआ समझौता-सहकारी समिति के कर्मचारियों की हड़ताल जारी-15 नवम्बर से प्रस्तावित धान खरीदी पर संकट के बादल-बढ़ी किसानों की चिंता

    Vinod GuptaBy Vinod GuptaNovember 13, 2025
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    बड़ी खबर-सरकार से नहीं हुआ समझौता-सहकारी समिति के कर्मचारियों की हड़ताल जारी-15 नवम्बर से प्रस्तावित धान खरीदी पर संकट के बादल-बढ़ी किसानों की चिंता

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    आरंग। सहकारी समितियो के कर्मचारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल थमने का नाम नहीं ले रही है। सरकार से किसी भी प्रकार का समझौता न होने के कारण कर्मचारी अपने चार सूत्रीय मांगों को लेकर डटे हुए हैं। हड़ताल के चलते समितियों में तालाबंदी की स्थिति बनी हुई है, जिससे 15 नवम्बर से शुरू होने वाली समर्थन मूल्य पर धान खरीदी की प्रक्रिया प्रभावित होना तय माना जा रहा है।सहकारी कर्मचारी संघ के जिलाध्यक्ष जय सपहा ने प्रेस विज्ञप्ति जारी करते हुए स्पष्ट किया है कि जब तक सरकार हमारी चार सूत्रीय मांगों को स्वीकार नहीं करती, तब तक आंदोलन बदस्तूर जारी रहेगा। सरकार ने अब तक केवल आश्वासन दिए हैं, पर ठोस निर्णय नहीं लिया गया है।हड़ताल के चलते न केवल समितियों का नियमित कार्य ठप है, बल्कि किसानों के लिए टोकन वितरण, पंजीयन, बारदाना वितरण और खरीदी केंद्रों की तैयारी भी अधर में लटक गई है। कई स्थानों पर प्राधिकृत पदाधिकारियों ने व्यवस्था संभालने की कोशिश की है, पर कर्मचारियों के बिना खरीदी प्रक्रिया को पटरी पर लाना मुश्किल साबित हो रहा है।ग्रामीण क्षेत्रों में किसान अब खरीदी तिथि नजदीक आने से चिंतित हैं। किसानों का कहना है कि यदि समय पर खरीदी शुरू नहीं हुई, तो कटाई के बाद खेतों में पड़ी फसल को नुकसान पहुंच सकता है। कुछ किसानों ने यह भी आशंका जताई है कि हड़ताल लम्बी खिंचने पर उन्हें निजी व्यापारियों को कम दर पर धान बेचने की मजबूरी झेलनी पड़ सकती है।इधर लखौली के किसान लक्ष्मीनारायण चन्द्राकर ने कहा कि हमारी पूरी मेहनत धान की फसल पर टिकी है। यदि सरकार और कर्मचारी संघ में जल्द समझौता नहीं हुआ तो नुकसान किसानों का होगा।वहीं ग्राम नारा के किसान कैलाश वर्मा ने कहा कि सरकार को जल्द वार्ता कर खरीदी की स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए, क्योंकि हम धान मंडी में बेचने की तैयारी कर चुके हैं।प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, स्थिति पर नजर रखी जा रही है। अगर हड़ताल जल्द समाप्त नहीं होती तो वैकल्पिक व्यवस्था बनाकर खरीदी प्रारंभ करने पर विचार किया जाएगा, ताकि किसानों को असुविधा न हो।चार प्रमुख मांगो मे (1)-समर्थन मूल्य धान खरीदी वर्ष 2023-24 एवं वर्ष 2024-25 में धान परिदान पश्चात हुई संपूर्ण सुखत मान्य कर राशि समितियों को देते हुए धान खरीदी वर्ष 2024-25 कंडिका 1.10 में परिवहन पश्चात संपूर्ण सुखत समिति को दे अथवा प्रत्येक सप्ताह संपूर्ण परिवहन हो और वर्ष 2024-25 में शुन्य शार्टेज प्रोत्साहन का भी प्रावधान कर विभिन्न प्रदत्त कमीशन, प्रशांगिक, सुरक्षा व्यय में बढोतरी की जावे एवं मध्य प्रदेश सरकार की भांति शासकीय उचित मूल्य दुकान दारों के विक्रेताओं को प्रतिमाह 3000 रूपये दी जावे, छ.ग. शासन के कलेक्टर द्वारा नामित प्रशासनिक धान खरीदी अधिकारी प्रभारी को खरीदी से सम्पूर्ण धान परिवहन मिलान अंतिम तक सुखत की जिम्मेदारी लिखित में जारी किया जावे। (2)–धान खरीदी नीति वर्ष 2024-25 में वर्णित कंडिका कमांक 11.3.3 आउट सोर्सिंग द्वारा कम्प्युटर आपरेटर के नियोजन को विलापित कर विभाग तय करते हुए नियमितिकरण किया जावे। (3)–प्रदेश के 2058 सहकारी समितियों में कार्यरत कर्मचारियों को वेतनमान देने हेतु प्रति वर्ष प्रत्येक समितियों को 3-3 लाख रूपये प्रबंधकीय अनुदान राशि मध्यप्रदेश सरकार की भांति दी जावे।(4) कांण्डे कमेटी की अध्यक्षता रिपोर्ट सेवानियम 2018 संशोधन में भविष्य निधि, मंहगाई भत्ता, ई.एस. आई.सी. सुविधा, संस्था के दैनिक / संविदा कर्मचारियों को समिति के सीधी भर्ती में प्राथमिकता / बोनस अंक अनवार्य कर शीघ्र लागू करते हुए बैंक केडर समिति प्रबंधक पद, तृतीय, चतुर्थ श्रेणी के बैंको के खाली पदों पर समितियों के सहायक कर्मचारियों को 50 प्रतिशत विभागीय भर्ती करते हुए उम्र एवं योग्यता में शिथिलता दी जावे।
    विनोद गुप्ता-आरंग

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