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    Home»Blog»इस गाँव के 56 एकड़ पर ‘उद्योग’ की दस्तक से गांव में बगावत की आहट-सौपा ज्ञापन
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    इस गाँव के 56 एकड़ पर ‘उद्योग’ की दस्तक से गांव में बगावत की आहट-सौपा ज्ञापन

    Vinod GuptaBy Vinod GuptaApril 3, 2026
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    इस गाँव के 56 एकड़ पर ‘उद्योग’ की दस्तक से गांव में बगावत की आहट-सौपा ज्ञापन

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    आरंग। आरंग विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत रसनी में शासकीय भूमि को औद्योगिक प्रयोजन के लिए हस्तांतरित करने की तैयारी अब गंभीर टकराव का रूप ले चुकी है। करीब 56 एकड़ (लगभग 22 हेक्टेयर) जमीन को उद्योगों के लिए देने की कवायद ने ग्रामीणों को आंदोलित कर दिया है। गांव में विरोध की चिंगारी अब भड़कती आग बनती नजर आ रही है, जहां लोग इसे केवल जमीन का नहीं, बल्कि अपने भविष्य और अस्तित्व का सवाल मान रहे हैं।जिला व्यापार एवं उद्योग विभाग की पहल पर जब तहसीलदार द्वारा 13 अलग-अलग खसरा नंबरों की इस जमीन के संबंध में ग्राम पंचायत से अभिमत मांगा गया, तो यह खबर गांव में बिजली की तरह फैल गई। सरपंच नंद कुमार चन्द्राकर, उपसरपंच पारस चन्द्राकर और सभी पंचों ने तत्काल आपात बैठक बुलाकर शासन के प्रस्ताव को सर्वसम्मति से खारिज कर दिया। पंचायत का साफ कहना है कि यह जमीन किसी भी स्थिति में उद्योगों को नहीं दी जाएगी।ग्रामीणों का आक्रोश केवल भावनात्मक नहीं, बल्कि व्यावहारिक चिंताओं से भी भरा हुआ है। जिस जमीन को प्रशासन उद्योगों के लिए चिन्हित कर रहा है, वही जमीन आज गांव के सामाजिक और आर्थिक जीवन का आधार बनी हुई है। यहां बच्चों के खेलने के लिए एकमात्र बड़ा मैदान है, जहां गांव की खेल गतिविधियां संचालित होती हैं। यही स्थान धान खरीदी केंद्र के रूप में किसानों की आजीविका को सहारा देता है और यही जमीन पशुओं के लिए चारागाह का काम करती है, जिससे ग्रामीणों की पशुपालन व्यवस्था टिकी हुई है।इतना ही नहीं, तेजी से बढ़ती आबादी को देखते हुए ग्रामीण इस भूमि को भविष्य की रिहायशी जरूरतों के लिए सुरक्षित मानते हैं। पर्यावरण संरक्षण के तहत यहां बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण भी किया गया है, जो गांव के प्राकृतिक संतुलन को बनाए रखने में अहम भूमिका निभा रहा है। ऐसे में उद्योगों की स्थापना से न केवल हरियाली खत्म होने का खतरा है, बल्कि प्रदूषण और जल संकट जैसी समस्याएं भी गांव को घेर सकती हैं।ग्रामीणों का कहना है कि यदि यह जमीन चली गई, तो गांव के पास न तो बच्चों के खेलने की जगह बचेगी, न पशुओं के चरने का स्थान और न ही भविष्य के लिए कोई सुरक्षित विकल्प कारखानों की चिमनियों के लिए हम अपनी पीढ़ियों का हक नहीं छीनने देंगे, यह स्वर अब हर घर से सुनाई दे रहा है।मामले ने राजनीतिक तूल भी पकड़ लिया है। जिला पंचायत सदस्य वतन अंगनाथ चन्द्राकर ने कलेक्टर को कड़े शब्दों में पत्र लिखकर चेतावनी दी है कि यदि जनभावनाओं को दरकिनार कर जमीन का आवंटन किया गया, तो पूरा क्षेत्र उग्र आंदोलन की राह पर जाएगा। उन्होंने स्पष्ट कहा है कि ऐसी स्थिति में किसी भी प्रकार की कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी।इस मुद्दे को और गंभीर बनाते हुए पत्र की प्रतियां क्षेत्रीय विधायक व मंत्री गुरु खुशवंत साहेब, राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री टंकराम वर्मा और उद्योग मंत्री लखन लाल देवांगन सहित सभी संबंधित अधिकारियों और पुलिस प्रशासन को भी भेजी गई हैं। इससे साफ है कि यह मामला अब स्थानीय स्तर से निकलकर प्रदेश की सियासत में भी हलचल पैदा कर चुका है।गांव में लगातार बैठकों का दौर जारी है और ग्रामीण अब संगठित होकर बड़े आंदोलन की रणनीति बना रहे हैं। यदि प्रशासन ने समय रहते संवाद स्थापित नहीं किया, तो यह विरोध प्रदर्शन सड़क पर उतरकर व्यापक आंदोलन का रूप ले सकता है।फिलहाल, रसनी में माहौल बेहद तनावपूर्ण है और हर किसी की नजर प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हुई है। सवाल सीधा है…क्या विकास के नाम पर गांव की बुनियादी जरूरतों और अधिकारों को नजरअंदाज किया जाएगा, या फिर जनभावनाओं का सम्मान करते हुए कोई संतुलित समाधान निकाला जाएगा।
    विनोद गुप्ता-आरंग

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    Vinod Gupta

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