विशेष-गौ-सम्मान आह्वान अभियान-आस्था से अधिकार तक की लड़ाई-आइये जाने क्यों पड़ी इस अभियान की जरूरत…
◼️प्रस्तावना — गौमाता भारत की सनातन परंपरा का केवल एक धार्मिक प्रतीक नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति, कृषि और जीवन पद्धति की आधारशिला रही हैं। हजारों वर्षों से “गौ संरक्षण” को धर्म, अर्थ और समाज— तीनों से जोड़ा गया है। भारतीय समाज में ‘गौ’ को ‘माता’ का स्थान दिया गया, क्योंकि वह केवल आस्था का केंद्र ही नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ भी रही है। लेकिन आज जब हम वर्तमान स्थिति को देखते हैं, तो एक असहज करने वाला प्रश्न सामने आता है कि क्या वास्तव में गौ माता सुरक्षित हैं, या उनका नाम केवल भावनाओं को भड़काने और राजनीतिक लाभ लेने का माध्यम बन गया है…?
यही वह बिंदु है जहां “गौ सम्मान आह्वान अभियान” केवल एक भावनात्मक नारा नहीं रह जाता, बल्कि एक जागरूकता और जवाबदेही की मांग बन जाता है। यह अभियान केवल गौ सेवा की बात नहीं करता, बल्कि उन सत्ताधारियों से भी सवाल पूछता है जिन्होंने गाय के नाम पर सत्ता की सीढ़ियाँ तो चढ़ीं, लेकिन शिखर पर पहुँचने के बाद अपेक्षित परिणाम नहीं दे पाए।
वास्तविकता यह है कि भारत में गौ हत्या को लेकर आज भी कोई एक समान राष्ट्रीय कानून लागू नहीं है। भारतीय संविधान का अनुच्छेद 48 राज्य को स्पष्ट निर्देश देता है कि ”राज्य कृषि और पशुपालन को वैज्ञानिक प्रणालियों से संगठित करेगा और विशेष रूप से गायों, बछड़ों तथा अन्य दुधारू मवेशियों की नस्लों के संरक्षण और उनके वध को रोकने (प्रतिषेध) के लिए प्रभावी कदम उठाएगा।” लेकिन यह अधिकार केंद्र सरकार के पास नहीं, बल्कि राज्यों के पास है।
यानी सच्चाई यह है कि :
- पूरे देश में एक समान “गौ हत्या प्रतिबंध कानून” आज भी नहीं है।
- अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग कानून हैं।
- कुछ राज्यों में आज भी गौ हत्या पूरी तरह प्रतिबंधित नहीं है।
तो सवाल उठता है— जब यह मुद्दा इतना बड़ा है, तो क्या कभी पूरे देश के लिए एक समान नीति बनाने की गंभीर कोशिश हुई…?
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 51A के तहत नागरिकों का भी यह कर्तव्य बताया गया है कि वे पर्यावरण और जीव-जंतुओं के प्रति दया भाव रखें और प्राकृतिक संसाधनों एवं पशुओं की रक्षा में योगदान दें। इसका सीधा संदेश यह है कि गौ संरक्षण केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज और नागरिकों की भी साझा जिम्मेदारी है।
यही वह पृष्ठभूमि है जिसमें “गौ सम्मान आह्वान अभियान” केवल एक भावनात्मक नारा नहीं रह जाता, बल्कि एक गंभीर सवाल बन जाता है— क्या संविधान द्वारा दिए गए निर्देशों का वास्तविक पालन हो रहा है या नहीं…?
आज गौमाता को सड़कों पर कचरा और प्लास्टिक खाने के लिए विवश होना पड़ रहा है, जबकि सरकारी गौ-शालाएं भ्रष्टाचार और कुप्रबंधन का केंद्र बन चुकी हैं। दिन-प्रतिदिन बढ़ती गौ-हत्याएं और गौ-रक्षकों का दमन यह सिद्ध करता है कि हिंदुत्व की राजनीति करने वाली पार्टी अब अपने मूल सिद्धांतों को विस्मृत कर चुकी है। नागरिक होने के नाते यह हमारा अधिकार और कर्तव्य है कि हम सरकार से जवाब मांगें कि 12 वर्षों के बाद भी गौ-वंश की सुरक्षा के लिए ठोस कदम क्यों नहीं उठाए गए…?
यह स्थिति सीधे तौर पर अनुच्छेद 48 और सुप्रीम कोर्ट के उन निर्देशों का अपमान है जो पशुधन के संरक्षण की बात करते हैं। जब हम दुनिया के चौथे सबसे बड़े निर्यातक बनते हैं, तो स्पष्ट है कि देश के भीतर बूचड़खाने और तस्करी का जाल कितना मजबूत हो चुका है। एक तरफ गौ-रक्षक जेलों में ठूंसे जा रहे हैं और दूसरी तरफ मांस निर्यात की फैक्ट्रियां सरकारी संरक्षण या मौन सहमति के बीच फल-फूल रही हैं। यह विरोधाभास स्पष्ट करता है कि हिंदुत्व की बात केवल चुनाव जीतने का एक मुखौटा है। यदि मंशा साफ होती, तो जिस देश में गौ-हत्या को महापाप माना जाता है, वह देश दुनिया को मांस परोसने में अग्रणी नहीं होता। यह प्रत्येक हिंदू और गौ-भक्त के लिए आत्म-मंथन का विषय है कि क्या हम वास्तव में गौ-माता को बचा रहे हैं, या हम केवल उस राजनीति का हिस्सा बनकर रह गए हैं जो धर्म के नाम पर शुरू होती है और व्यापार पर जाकर खत्म हो जाती है।
“गौ सम्मान आह्वान अभियान” का मूल उद्देश्य यही है कि गौमाता केवल भाषणों और भावनाओं तक सीमित न रहें, बल्कि उनके संरक्षण के लिए ठोस, समान और प्रभावी व्यवस्था बने।
अब समय आ गया है कि हर हिन्दू केवल पढ़कर आगे न बढ़े, बल्कि इस अभियान का हिस्सा बने। अगर गौमाता सुरक्षित नहीं हैं, तो मंदिर-मंदिर भटकने का कोई वास्तविक अर्थ नहीं रह जाता, क्योंकि शास्त्रों के अनुसार 33 कोटि देवी-देवताओं का वास स्वयं गौमाता में ही माना गया है। जब मूल ही असुरक्षित है, तो केवल प्रतीकों की पूजा से धर्म की रक्षा अधूरी रह जाती है।
🏛️ कल 27 अप्रैल को प्रातः 10:00 बजे श्री कुमारेश्वर महादेव मंदिर आरंग से निकलने वाले गौ सम्मान पद यात्रा में शामिल होइये और SDM कार्यालय में जाकर ज्ञापन दें।
गौ संरक्षण के लिए एक समान राष्ट्रीय नीति और सख्त कानून की मांग करें और अपने आसपास के लोगों को भी जागरूक करें।याद रखिए—भावनाएं तभी सार्थक होती हैं जब वे कर्तव्य में बदलें। गौमाता का सम्मान केवल शब्दों से नहीं, बल्कि आपके कदमों से सिद्ध होगा।
🔏 लेखक : पंकज सनातनी



