48 घंटे की झमाझम बारिश के बाद खुला मौसम-खेतों में लौटी रौनक-कहीं लेई चोपी से बोआई तो कहीं दोबारा बीज डालने की मजबूरी
आरंग।बीते दिनों हुई 48 घंटे की अनवरत और भारी बारिश के बाद आखिरकार 7-8 जुलाई को मौसम साफ हुआ है। धूप खिलते ही अंचल के खेतों में अचानक कृषि गतिविधियों ने रफ्तार पकड़ ली है और किसान पूरी ताकत से धान बुआई के काम में जुट गए हैं।मौसम खुलने का सबसे ज्यादा फायदा उन किसानों को मिला है, जिन्होंने अब तक धान की बोआई नहीं की थी। ऐसे किसानों ने गुरुवार को धूप निकलते ही खेतों को मचाकर (मचोड़कर) ‘लेई चोपी (अंकुरित बीज रोपण) पद्धति से बड़े पैमाने पर धान की बोआई शुरू कर दी है। खेतों में ट्रैक्टरों की गड़गड़ाहट और किसानों की भारी भीड़ देखी जा सकती है।वहीं, जिन किसानों ने बारिश से ठीक पहले सूखी बोआई (खुर्रा बोनी) कर ली थी, उनकी चिंताएं बढ़ी हुई थीं। खेतों में भारी पानी जमा होने के कारण फसल खराब होने का डर था। ऐसे किसान पिछले दो दिनों से खेतों में ‘गर्दी’ (समूह) बनाकर पूरी शिद्दत से जल निकासी (पानी खाली करने) के काम में जुटे रहे, ताकि बीज सड़ने से बच सकें।बारिश ने कुछ किसानों को तगड़ा आर्थिक झटका भी दिया है। अनेक किसानों ने मानसून की शुरुआत से महज 2-3 दिन पहले ही धान की बोआई की थी। इसके तुरंत बाद मूसलाधार बारिश होने से खेतों में कई फीट पानी जमा हो गया। अब जब कड़ी मशक्कत के बाद खेतों से पानी खाली किया गया, तो बीजों में अंकुरण (उगाव) नदारद मिला।अत्यधिक पानी और उमस के कारण बीज खेतों में ही सड़ गए। नतीजतन, ऐसे पीड़ित किसान अब भारी मन से दोबारा बोआई (डबल बोनी) करने को विवश दिखाई दे रहे हैं, जिससे उन पर बीज और खाद का दोहरा खर्च आ पड़ा है।किसानों का कहना है कि मौसम ने इस बार शुरुआती दौर में ही परीक्षा ले ली है। जिन खेतों से पानी निकल गया है, वहां उम्मीद बची है। लेकिन जहां बीज सड़ गए हैं, वहां दोबारा मेहनत और पैसा लगाना हमारी मजबूरी बन गया है।बहरहाल मौसम साफ होने के बाद ग्रामीण अंचलों में कृषि कार्य चरम पर है। आने वाले दिनों में यदि धूप और छांव का यह संतुलन बना रहा, तो बोनी के काम में और तेजी आने की उम्मीद है।
विनोद गुप्ता-आरंग



