ग्राम भिलाई में दिखा अनुशासन एवं राष्ट्रभक्ति का संगम-72 स्वयंसेवकों ने पूर्ण गणवेश में निकाला पथ संचलन
आरंग। विजयादशमी पर्व के पावन उपलक्ष्य में ग्राम भिलाई में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा शस्त्र पूजन एवं पथ संचलन का आयोजन किया गया। इस दौरान अनुशासन और राष्ट्रभक्ति का अनूठा संगम देखने को मिला, जहां कुल 72 स्वयंसेवकों ने पूर्ण गणवेश में कदमताल करते हुए पथ संचलन में भाग लिया। कार्यक्रम का शुभारंभ शस्त्र पूजन के साथ विधि-विधान से संपन्न हुआ।कार्यक्रम के मुख्य अतिथि कबीर आश्रम भिलाई के विजेंद्र साहेब ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ समाज को संस्कार सिखाने की पाठशाला है। संघ के माध्यम से धर्म और जीवन मूल्यों का वास्तविक ज्ञान प्राप्त होता है। जिस मनुष्य के संस्कार श्रेष्ठ होंगे, उसका धर्म भी उतना ही सुदृढ़ होगा। उन्होंने आगे कहा कि संघ अपनी स्थापना के 100 वर्ष पूर्ण कर चुका है, ऐसे में हम सभी का दायित्व बनता है कि राष्ट्र के प्रति पूर्ण निष्ठा व ईमानदारी से समर्पित रहें। संघ की शाखाओं का मूल उद्देश्य समाज को सुसंस्कृत और संस्कारवान बनाना है।मुख्य वक्ता हेमंत साहू ने विजयादशमी की शुभकामनाएं देते हुए संघ की ऐतिहासिक यात्रा पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि आज से 101 वर्ष पूर्व परम पूज्य डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार जी ने नागपुर के मोहिते बाड़ा में संघ का बीजारोपण किया था। शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में निर्धारित 07 प्रमुख कार्यक्रमों की पूर्णता के बाद आज यह भव्य आयोजन हो रहा है।उन्होंने बताया कि ‘इदं राष्ट्राय इदं न मम’ (यह राष्ट्र के लिए है, मेरा नहीं) के भाव से आज संघ और उसके विभिन्न आनुषांगिक संगठन निरंतर सेवा में जुटे हैं। वर्तमान में विश्व के 80 देशों में संघ का कार्य विस्तारित हो चुका है और अकेले भारत में 1 लाख से अधिक दैनिक शाखाएं संचालित हैं।उन्होंने कहा कि संघ की शाखा वास्तव में व्यक्ति के शारीरिक, मानसिक और सर्वांगीण व्यक्तित्व विकास का केंद्र है। उन्होंने पहदा मंडल के प्रत्येक गांव में शाखा विस्तार का आह्वान किया। साथ ही उन्होंने संघ के ‘पंच परिवर्तन’ के संकल्पों—कुटुंब प्रबोधन, नागरिक कर्तव्य बोध, पर्यावरण संरक्षण (वृक्षारोपण) और ‘स्व’ के जागरण पर विस्तार से विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्वयंसेवक और ग्रामीणजन उपस्थित रहे।
विनोद गुप्ता-आरंग



