राष्ट्रीय नेत्रदान पखवाड़ा-स्कूल में 294 बच्चों का हुआ नेत्र परीक्षण
आरंग।मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मिथलेश चौधरी के निर्देशन एवं खंड चिकित्सा अधिकारी डॉ. विजय लक्ष्मी अनंत के मार्गदर्शन में राष्ट्रीय नेत्रदान पखवाड़ा कार्यक्रम के तहत स्वास्थ्य विभाग द्वारा 25 अगस्त से 8 सितंबर तक व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में आज शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बनरसी में विशेष स्वास्थ्य एवं नेत्र परीक्षण शिविर का आयोजन किया गया।शिविर में 294 विद्यार्थियों का नेत्र परीक्षण किया गया। नेत्र परीक्षण के दौरान 06 विद्यार्थी दृष्टिदोष से पीड़ित पाए गए, जिनका चश्मे के लिए परीक्षण किया गया। शासन के नियमानुसार इन बच्चों को निःशुल्क चश्मा प्रदान किया जाएगा, ताकि उन्हें अध्ययन एवं दैनिक जीवन में दृष्टि संबंधी किसी प्रकार की परेशानी न हो।।नेत्र परीक्षण के लिए नेत्र सहायक अधिकारी आरंग सालिक नौरंगे उपस्थित रहे। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय नेत्रदान पखवाड़ा कार्यक्रम एवं जिला प्रशासन के निरामय प्रोजेक्ट के अंतर्गत बच्चों का नेत्र परीक्षण किया जा रहा है। समय पर नेत्र संबंधी समस्याओं की पहचान कर उचित उपचार एवं चश्मे की सुविधा उपलब्ध कराना इस अभियान का प्रमुख उद्देश्य है।इस अवसर पर विद्यार्थियों एवं शिक्षकों को नेत्रदान के संबंध में विस्तार से जानकारी दी गई। बताया गया कि नेत्रदान एक महान एवं मानवीय कार्य है, जिसके माध्यम से मृत्यु के उपरांत किसी व्यक्ति की आंखों के कॉर्निया का उपयोग कर कॉर्नियल अंधत्व से पीड़ित लोगों को नई रोशनी प्रदान की जा सकती है। नेत्रदान के प्रति समाज में फैली भ्रांतियों को दूर करते हुए लोगों से अधिक से अधिक जागरूक होने एवं अपने परिवारजनों को भी इसके लिए प्रेरित करने की अपील की गई।विद्यार्थियों को बताया गया कि नेत्रदान के लिए केवल इच्छा व्यक्त करना ही महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि इस संबंध में अपने परिजनों को भी जानकारी देना आवश्यक है, ताकि मृत्यु के पश्चात परिवारजन समय पर नेत्रदान की प्रक्रिया के लिए संबंधित स्वास्थ्य संस्था या अधिकृत नेत्र बैंक से संपर्क कर सकें। नेत्रदान से किसी व्यक्ति का पूरा नेत्र नहीं, बल्कि मुख्य रूप से कॉर्निया प्रत्यारोपण के लिए लिया जाता है। यह प्रक्रिया सम्मानपूर्वक एवं प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों द्वारा की जाती है तथा इससे मृतक के चेहरे की सामान्य आकृति प्रभावित नहीं होती। नेत्रदान के माध्यम से दृष्टिहीन व्यक्तियों के जीवन में रोशनी लाने का अवसर मिलता है।शिविर के दौरान आरबीएसके चिरायु टीम द्वारा विद्यार्थियों का संपूर्ण स्वास्थ्य परीक्षण भी किया गया। साथ ही 240 विद्यार्थियों के रक्त के नमूने संग्रहित किए गए, जिनमें सीबीसी, ब्लड ग्रुप, लिवर एवं किडनी फंक्शन, थायरॉइड, सिकल सेल, आरबीएस, विटामिन डी-3 सहित अन्य आवश्यक जांचें की गईं।इस अवसर पर आरबीएसके चिरायु टीम के डॉ. अबरार आलम, डॉ. शोभा निषाद, एमएलटी मुकेश साहू, फार्मासिस्ट दुमेंद्र ध्रुवे, विद्यालय की प्राचार्य, शिक्षक गण एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
राष्ट्रीय नेत्रदान पखवाड़ा के माध्यम से स्वास्थ्य विभाग द्वारा आमजन को नेत्रदान के महत्व से जोड़ते हुए यह संदेश दिया जा रहा है कि मृत्यु के बाद भी किसी के जीवन में रोशनी लाई जा सकती है, इसलिए नेत्रदान का संकल्प लें और दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करें।
विनोद गुप्ता-आरंग



