चिंगरौंद नदी से बेखौफ दिन रात रेत की चोरी , पंचायत की रैम निर्माण की अनुमति बनी ढाल। सैकड़ों हाईवा रेत का अवैध खनन। सरपंच अनजान।

जिले के ग्राम चिंगरौंद में रेत के अवैध खनन और परिवहन का एक गंभीर और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां पंचायत द्वारा केवल रैम (अस्थायी मार्ग) निर्माण की अनुमति ली गई थी, लेकिन उसी प्रस्ताव को ढाल बनाकर चिंगरौंद नदी से बड़े पैमाने पर अवैध रेत खनन किया जा रहा है। हालात ऐसे हैं कि चैन माउंटेन मशीनों के जरिए दिन ही नहीं, बल्कि रात के अंधेरे में भी खुलेआम रेत की चोरी जारी है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार ग्राम लाफिन खुर्द के खसरा नंबर 2480 में लगभग 5 हेक्टेयर क्षेत्र में रेत घाट की स्वीकृति खनिज विभाग द्वारा दी गई है। लेकिन इस रेत घाट तक पहुंचने के लिए लाफिन खुर्द की ओर से कोई परिवहन मार्ग उपलब्ध नहीं है। इसी कारण रेत घाट तक पहुंचने के लिए चिंगरौंद नदी की दिशा से एक रैम (अस्थायी रास्ता) बनाया जा रहा है।

रैम निर्माण की अनुमति, लेकिन हकीकत कुछ और
चिंगरौंद ग्राम पंचायत स्तर पर केवल रैम निर्माण के लिए प्रस्ताव पारित किया गया था, ताकि वैकल्पिक रास्ता तैयार हो सके। लेकिन मौके पर जो तस्वीर सामने आ रही है, वह पंचायत के प्रस्ताव से बिल्कुल उलट है। रैम निर्माण की आड़ में नदी के भीतर दो चैन माउंटेन मशीनें उतार दी गई हैं और सीधे नदी से रेत का खनन किया जा रहा है।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि पिछले करीब एक महीने से चिंगरौंद नदी से हजारों हाईवा रेत अवैध रूप से निकाली जा चुकी है। यह खनन पूरी तरह से नियमों को ताक पर रखकर किया जा रहा है, जिससे नदी के अस्तित्व, पर्यावरण और आसपास के गांवों के भविष्य पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है।

सरपंच का बयान सवालों के घेरे में
मामले में सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि चिंगरौंद ग्राम पंचायत के सरपंच छेरकूं राम निषाद का कहना है कि उन्हें अवैध खनन की कोई जानकारी नहीं है। उनका कहना है कि पंचायत से केवल रैम निर्माण के लिए ही प्रस्ताव पास किया गया था।

अब बड़ा सवाल यह उठता है कि जिस पंचायत क्षेत्र में दिन-रात भारी मशीनें लगाकर रेत का खनन और सैकड़ों हाईवा का आवागमन हो रहा है, उसकी जानकारी सरपंच को कैसे नहीं है? क्या यह अनभिज्ञता है या फिर जानबूझकर आंखें मूंदी जा रही हैं? ग्रामीणों के बीच यह चर्चा आम है कि कहीं जिम्मेदार लोग “बैठे-बैठे मलाई” तो नहीं खा रहे।

खनिज विभाग की चुप्पी
इस पूरे मामले में अब तक खनिज विभाग अनजान बना बैठा है। बड़े पैमाने पर हो रहे अवैध खनन की जानकारी विभाग को है या नहीं ये भी स्पष्ट नहीं है। प्रशासनिक चुप्पी ने रेत माफियाओं के हौसले और बुलंद कर दिए हैं।

कार्रवाई होगी या यूं ही चलता रहेगा खेल?
अब सवाल यह है कि क्या इस अवैध खनन पर सख्त कार्रवाई होगी?
क्या मौके पर लगी चैन माउंटेन मशीनें और रेत से भरे हाईवा जब्त किए जाएंगे?
और क्या पंचायत स्तर से लेकर संबंधित विभागों के जिम्मेदार अधिकारियों पर भी कार्रवाई होगी?
फिलहाल चिंगरौंद नदी से रेत की खुलेआम लूट जारी है और प्रशासन की निष्क्रियता पर कई गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। अब देखना यह होगा कि शासन-प्रशासन इस मामले को कितनी गंभीरता से लेता है या फिर यह मामला भी अन्य मामलों की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगा।