बाल विवाह के खिलाफ यहाँ के महिलाओं का बड़ा संकल्प-बाल विवाह मुक्त भारत’ का लिया सामूहिक शपथ

आरंग। जनपद पंचायत आरंग अंतर्गत ग्राम पंचायत जरौद (उमरिया) में बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीति के खिलाफ महिलाओं ने एकजुट होकर सशक्त आवाज बुलंद की। पंचायत स्तर पर आयोजित विशेष जागरूकता कार्यक्रम में सैकड़ों महिलाओं ने बाल विवाह मुक्त भारत बनाने की सामूहिक शपथ लेकर सामाजिक बदलाव का स्पष्ट संदेश दिया।कार्यक्रम में महिलाओं ने संकल्प लिया कि वे न केवल अपने परिवारों में, बल्कि पूरे गांव और आसपास के क्षेत्रों में बाल विवाह को रोकने के लिए सक्रिय भूमिका निभाएंगी। शपथ के दौरान गूंजे नारों ने यह साफ कर दिया कि ग्रामीण स्तर पर महिलाएं अब जागरूक हो चुकी हैं और बेटियों के अधिकारों को लेकर दृढ़ हैं।वक्ताओं ने महिलाओं को संबोधित करते हुए कहा कि बाल विवाह कानूनन अपराध होने के साथ-साथ बेटियों के स्वास्थ्य, शिक्षा और भविष्य के सपनों के लिए घातक है। कम उम्र में विवाह से मातृत्व संबंधी जोखिम,कुपोषण और शैक्षणिक बाधाएं उत्पन्न होती हैं जिनका खामियाजा पूरी पीढ़ी को भुगतना पड़ता है।महिलाओं ने यह भी प्रण लिया कि यदि उनके आसपास कहीं भी बाल विवाह की सूचना मिलती है, तो वे तत्काल प्रशासन को सूचित करेंगी और उसे रुकवाने का हरसंभव प्रयास करेंगी। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में बाल विवाह को लेकर चली आ रही पुरानी और रूढ़िवादी सोच को बदलना बताया गया।महिला स्व-सहायता समूहों के नेतृत्व में आयोजित इस कार्यक्रम में विशेष रूप से बेटियों की कम उम्र में शादी के बजाय शिक्षा और कौशल विकास को प्राथमिकता देना।कम उम्र में मातृत्व के खतरों और कुपोषण के दुष्परिणामों के प्रति जागरूकता।बाल विवाह निषेध अधिनियम की धाराओं एवं सजा के प्रावधानों की जानकारी देने पर जोर दिया।इस अवसर पर आंगनबाड़ी कार्यकर्ता तोरण ध्रुव, पूर्णिमा डहरिया, सहायिकाएं कल्याणी ध्रुव, तारणी ध्रुव सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण महिलाएं उपस्थित रहीं। महिलाओं की इस एकजुट पहल ने यह साबित कर दिया कि सामाजिक बदलाव की शुरुआत अब गांव की गलियों से हो चुकी है।
विनोद गुप्ता-आरंग

