ऐतिहासिक कवि सम्मेलन के साथ दो दिवसीय राजा मोरध्वज महोत्सव का हुआ समापन-ओज, वीर रस, श्रृंगार और राष्ट्रभाव से परिपूर्ण कविताओं से श्रोता हुए भावविभोर….

आरंग।त्याग, तपस्या और धर्मपरायणता के प्रतीक महान राजा मोरध्वज की स्मृति में आयोजित दो दिवसीय राजा मोरध्वज महोत्सव का समापन शुक्रवार को श्रद्धा, संस्कृति और साहित्य के संगम के साथ गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ।इस अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने ऐतिहासिक नगर आरंग की धरती से प्रदेशवासियों को संबोधित करते हुए कहा कि राजा मोरध्वज केवल इतिहास के पात्र नहीं, बल्कि त्याग, सत्य और जनकल्याण की जीवंत परंपरा हैं। उनका जीवन आज के समय में भी सुशासन, सामाजिक समरसता और राष्ट्रप्रेम का मार्ग दिखाता है।मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ की संस्कृति, लोकपरंपरा और इतिहास की जड़ें अत्यंत समृद्ध हैं। राजा मोरध्वज की गाथा हमें सिखाती है कि सत्ता सेवा का माध्यम है, अहंकार का नहीं। जनकल्याण ही सच्चा धर्म है और यही छत्तीसगढ़ की आत्मा है।उन्होंने आरंग को धार्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक दृष्टि से विशिष्ट बताते हुए कहा कि इस प्रकार के महोत्सव नई पीढ़ी को अपने गौरवशाली अतीत से जोड़ने का सशक्त माध्यम हैं।मुख्यमंत्री साय ने आयोजन की भव्यता की सराहना करते हुए आयोजकों, कलाकारों और जनसहभागिता को साधुवाद दिया।

समापन संबोधन में मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से आह्वान किया कि वे राजा मोरध्वज के आदर्शों त्याग, सत्य और जनसेवा को अपने जीवन में उतारें। हम सब मिलकर छत्तीसगढ़ को सांस्कृतिक रूप से समृद्ध, सामाजिक रूप से सशक्त और विकास के पथ पर अग्रसर बनाएंगे। यही इस महोत्सव की सच्ची सार्थकता है।कार्यक्रम के अंत में मुख्यमंत्री ने राजा मोरध्वज को नमन करते हुए महोत्सव के सफल आयोजन के लिए आरंग की जनता को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ दीं। महोत्सव में आने के पहले उन्होंने बाबा बागेश्वर मंदिर जा कर बाबा बागेश्वर नाथ बाबा की पूजा अर्चना कर छतीसगढ़ के समृद्धि और खुशहाली की कामना की इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री अरुण साव, रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल , विजय बघेल, सतनामी समाज के धर्मगुरु बालदास साहेब, आयोजन के संयोजक केबिनेट मंत्री गुरु खुशवंत साहेब, ध्रुव कुमार मिर्धा एवं पीठाधीश राजीव लोचन महराज, विधायक रोहित साहू, इंद्र कुमार साहू, शालिनी राजपूत, आरंग पालिका अध्यक्ष डॉ संदीप जैन, जनपद अध्यक्ष टाकेश्वरी मुरली साहू सहित अन्य अतिथिगण उपस्थित रहे।कार्यक्रम में प्रदेश के विभिन्न मंडल तथा निगमो के अध्यक्षो भी उपस्थित रहे।कार्यक्रम का सफल संचालन संजय शर्मा तथा विनोद गुप्ता ने किया तथा आभार प्रदर्शन डॉ संदीप जैन ने किया।

महोत्सव के दूसरे और अंतिम दिन सुबह से देर रात तक चले आयोजनों ने नगर को उत्सव और गौरव से सराबोर कर दिया।इसी कड़ी में सुबह 9 बजे से 12 बजे तक माता गायत्री की विधिवत यज्ञ–हवन एवं पूजन संपन्न हुआ। वैदिक मंत्रोच्चार और हवन की पवित्र अग्नि के बीच नगरवासियों ने सुख–समृद्धि और शांति की कामना की। धार्मिक अनुष्ठान ने पूरे वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया।दोपहर 2 बजे से 5 बजे तक स्कूल एवं कॉलेज के छात्र–छात्राओं द्वारा रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति दी गई। देशभक्ति, लोकसंस्कृति और सामाजिक संदेशों से ओत-प्रोत नृत्य, गीत और नाट्य प्रस्तुतियों ने दर्शकों की भरपूर तालियां बटोरीं। विद्यार्थियों की प्रतिभा और अनुशासन ने मंच को जीवंत बना दिया।शाम 5 से 6 बजे तक छत्तीसगढ़ की सुप्रसिद्ध लोकगाथा लोरीक–चंदा की मनमोहक प्रस्तुति देउर गांव साजा से पधारे कलाकारों द्वारा दी गई।लोककथा की जीवंत प्रस्तुति ने दर्शकों को छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से जोड़ा।इसके पश्चात शाम 6 से 7 बजे तक धमतरी से आई राजा मोरध्वज की भव्य झांकी ने सभी का ध्यान आकर्षित किया। झांकी में राजा मोरध्वज के त्याग, बलिदान और धर्मनिष्ठ जीवन की झलक ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया।

महोत्सव का सबसे प्रतीक्षित क्षण रात 11 बजे तब आया, जब देश के प्रख्यात कवि डॉ. कुमार विश्वास के कवि सम्मेलन से आयोजन का भव्य समापन हुआ। उनके साथ आये हास्य कवि रोहित शर्मा, श्रृंगार रस की कवियत्री साक्षी तिवारी, हास्य और व्यंग के सशक्त हस्ताक्षर दिनेश बावरा तथा वीर रस के कवि विनीत चौहान नेअपने ओज, वीर रस, श्रृंगार और राष्ट्रभाव से परिपूर्ण कविताओं ने श्रोताओं को देर रात तक बांधे रखा।

तालियों की गूंज और भावनाओं का सैलाब आयोजन की ऐतिहासिक सफलता का साक्षी बना।दो दिवसीय राजा मोरध्वज महोत्सव ने न केवल इतिहास और संस्कृति को जीवंत किया, बल्कि नई पीढ़ी को त्याग, समर्पण और नैतिक मूल्यों से जोड़ने का सार्थक प्रयास भी किया। नगरवासियों, अतिथियों और आयोजकों के सहयोग से यह आयोजन स्मरणीय बन गया।
विनोद गुप्ता-आरंग-8871644730



