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अब उम्र नहीं रही ढाल, युवाओं को जकड़ रहा बीपी-शुगर

बदलती जीवनशैली से बढ़ रहा बीपी-शुगर का खतरा, युवा भी चपेट में


तेजी से बदलती जीवनशैली अब लोगों की सेहत पर भारी पड़ने लगी है। कभी बुजुर्गों की बीमारी मानी जाने वाली ब्लड प्रेशर और डायबिटीज अब युवाओं में भी तेजी से बढ़ रही है। जिले के सरकारी व निजी अस्पतालों में इलाज के लिए पहुंचने वाले मरीजों में 25 से 40 वर्ष की उम्र के लोगों की संख्या लगातार बढ़ रही है।
चिकित्सकों के अनुसार, फास्ट फूड, शारीरिक श्रम की कमी, मोबाइल और स्क्रीन टाइम का बढ़ता उपयोग, अनियमित नींद और मानसिक तनाव इसकी प्रमुख वजह हैं। कई मामलों में मरीजों को तब पता चलता है, जब स्थिति गंभीर हो चुकी होती है।


डॉक्टरों की राय
एक चिकित्सक ने बताया कि
“पहले बीपी और शुगर के मरीज अधिकतर 50 वर्ष से ऊपर होते थे, लेकिन अब 30 साल के युवा भी नियमित दवा पर आ चुके हैं। समय पर जांच नहीं होने से खतरा और बढ़ जाता है।”


लक्षणों को न करें नजरअंदाज
विशेषज्ञों का कहना है कि बार-बार सिरदर्द, चक्कर आना, थकान, ज्यादा प्यास लगना, बार-बार पेशाब आना और वजन तेजी से घटना जैसे लक्षण दिखें तो तुरंत जांच करानी चाहिए।


ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता की कमी
ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य जांच की सुविधाएं सीमित होने के कारण लोग बीमारी को हल्के में लेते हैं। नियमित स्वास्थ्य परीक्षण नहीं होने से बीपी और शुगर लंबे समय तक अनियंत्रित रहती है, जिससे हार्ट अटैक, किडनी फेल और ब्रेन स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है।


बचाव ही है सबसे बेहतर उपाय
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार,
रोजाना कम से कम 30 मिनट पैदल चलना
संतुलित व कम नमक-शक्कर वाला आहार
तनाव से दूरी और पूरी नींद
साल में कम से कम एक बार बीपी-शुगर जांच
अपनाकर इस गंभीर बीमारी से बचा जा सकता है।
जरूरत है समय रहते चेतने की


स्वास्थ्य विभाग की ओर से जागरूकता अभियान चलाए जाने की जरूरत है, ताकि युवा वर्ग समय रहते सतर्क हो सके और गंभीर बीमारियों से बचा जा सके।

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