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    Home»Blog»महिला एवं बाल विकास तथा समाज कल्याण विभाग के बजट में पोषण, महिला सशक्तिकरण और दिव्यांग हितों की उपेक्षा – चातुरी नंद
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    महिला एवं बाल विकास तथा समाज कल्याण विभाग के बजट में पोषण, महिला सशक्तिकरण और दिव्यांग हितों की उपेक्षा – चातुरी नंद

    Rekhraaz SahuBy Rekhraaz SahuMarch 14, 2026
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    महिला एवं बाल विकास तथा समाज कल्याण विभाग के बजट में पोषण, महिला सशक्तिकरण और दिव्यांग हितों की उपेक्षा – चातुरी नंद

    • दिव्यांग पेंशन में बढ़ोत्तरी कर 1 हजार प्रतिमाह, रेडी टू ईट का संचालन महिला समूहों को देने सहित कई महत्वपूर्ण मुद्दों के प्रति विभागीय मंत्री का कराया ध्यानाकर्षण

    सरायपाली, 14 फरवरी 2026। छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र में सरायपाली विधायक चातुरी नंद ने अनुदान मांगो के विरोध में अपनी बातें रखी। विधायक चातुरी नंद ने सदन में मांग संख्या 34 एवं 55 (महिला एवं बाल विकास विभाग तथा समाज कल्याण विभाग) के अनुदान मांगों पर चर्चा के दौरान बजट का विरोध करते हुए कहा कि सरकार महिला सशक्तिकरण और बाल विकास के बड़े-बड़े दावे तो कर रही है, लेकिन जमीनी स्तर पर योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन दिखाई नहीं दे रहा है। उन्होंने कहा कि आंगनबाड़ी सेवाओं, पोषण आहार, महिला स्व-सहायता समूहों के सशक्तिकरण तथा दिव्यांगजनों के कल्याण से जुड़ी कई महत्वपूर्ण योजनाओं में गंभीर अनियमितताएं और लापरवाही सामने आ रही हैं।

    विधायक ने कहा कि सरकार ने आंगनबाड़ी केन्द्रों में वितरित होने वाले रेडी टू ईट पोषण आहार के संचालन को महिला स्व-सहायता समूहों को देने की घोषणा की थी, जिससे महिलाओं को रोजगार भी मिलेगा और पोषण आहार की गुणवत्ता भी बेहतर होगी। लेकिन आज तक प्रदेश में इस व्यवस्था को प्रभावी ढंग से लागू नहीं किया जा सका है। उन्होंने कहा कि महिला समूहों को सशक्त बनाने के लिए की गई घोषणा केवल कागजों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि उसे पूरी पारदर्शिता और गंभीरता के साथ लागू किया जाना चाहिए।

    विधायक ने कहा कि कई आंगनबाड़ी केन्द्रों में चिक्की और अन्य पोषण आहार की सप्लाई समय पर नहीं पहुंच रही है, जिससे बच्चों और गर्भवती एवं धात्री माताओं के पोषण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। प्रधानमंत्री पोषण आहार योजना के तहत बच्चों को पौष्टिक आहार उपलब्ध कराना सरकार की जिम्मेदारी है, लेकिन सप्लाई व्यवस्था में अव्यवस्था के कारण आंगनबाड़ी केन्द्रों तक सामग्री समय पर नहीं पहुंच पाती। वर्तमान में पोषण सामग्री की आपूर्ति बीज विकास निगम के माध्यम से की जा रही है, लेकिन इसके बावजूद समयबद्ध आपूर्ति सुनिश्चित नहीं हो पा रही है, जिससे कुपोषण जैसी गंभीर समस्या से निपटने के प्रयास कमजोर पड़ रहे हैं।

    उन्होंने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के लिए ड्रेस वितरण योजना में भी अनियमितताओं का मुद्दा उठाते हुए कहा कि टेंडर प्रक्रिया और वितरण व्यवस्था में गड़बड़ियों की शिकायतें सामने आई हैं। कार्यकर्ताओं से जुड़ी योजनाओं में किसी भी प्रकार की लापरवाही या भ्रष्टाचार अत्यंत गंभीर विषय है और इसकी निष्पक्ष जांच कराकर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।

    विधायक ने दिव्यांगजनों से जुड़ी योजनाओं की ओर ध्यान आकर्षित करते हुए कहा कि बैटरी चलित वाहन वितरण योजना में 80 प्रतिशत दिव्यांगता और पांच वर्ष की अवधि की अनिवार्यता जैसी कठोर शर्तें लागू की गई हैं, जिसके कारण अनेक जरूरतमंद दिव्यांगजन इस योजना का लाभ नहीं ले पा रहे हैं। उन्होंने सरकार से इन शर्तों को समाप्त या सरल बनाने की मांग की, ताकि अधिक से अधिक दिव्यांगजन इस योजना से लाभान्वित हो सकें।

    उन्होंने यह भी कहा कि फर्जी दिव्यांग प्रमाणपत्र के आधार पर कई लोग शासकीय सेवाओं में कार्यरत हैं और कुछ लोग तो उच्च पदों पर भी पहुंच चुके हैं। इस संबंध में जांच होने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है, जिससे वास्तविक दिव्यांगजनों के अधिकारों का हनन हो रहा है। उन्होंने सरकार से मांग की कि ऐसे मामलों में कठोर कार्रवाई कर वास्तविक लाभार्थियों के अधिकारों की रक्षा की जाए।

    विधायक ने यह भी कहा कि वर्तमान में दिव्यांगो को कई योजनाओं के लिए ग्रामीण क्षेत्र की वर्ष 2002-03 तथा शहरी क्षेत्र की वर्ष 2007-08 की दिव्यांग सर्वे सूची को आधार माना जा रहा है, जो अब पूरी तरह पुरानी हो चुकी है। उन्होंने इस अनिवार्यता को समाप्त कर राज्य में नया व्यापक सर्वे कराने की मांग की, ताकि सभी पात्र दिव्यांगजनों को योजनाओं का लाभ मिल सके।
    उन्होंने कहा कि राज्य में दिव्यांगजनों को मात्र 500 रुपये प्रतिमाह पेंशन दी जा रही है, जो वर्तमान महंगाई के दौर में अत्यंत कम है। अन्य राज्यों में दिव्यांग पेंशन इससे कहीं अधिक दी जा रही है। इसलिए छत्तीसगढ़ में भी दिव्यांग पेंशन राशि को बढ़ाकर कम से कम 1000 रुपये प्रतिमाह किया जाना चाहिए, ताकि दिव्यांगजन सम्मानपूर्वक जीवनयापन कर सकें।

    विधायक ने मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि इस योजना के तहत निर्धन परिवारों की बेटियों का सामूहिक विवाह कराया जाता है और उन्हें उपहार सामग्री के साथ 50 हजार रुपये की सहायता राशि देने का प्रावधान है, लेकिन कई मामलों में इस राशि के वितरण में अत्यधिक विलंब होता है तथा कुछ स्थानों पर फर्जी भुगतान की शिकायतें भी सामने आई हैं। उन्होंने योजना के क्रियान्वयन में पारदर्शिता लाने और पात्र हितग्राहियों को समय पर सहायता राशि उपलब्ध कराने की मांग की।

    विधायक ने कहा कि महिला एवं बाल विकास विभाग से जुड़ी योजनाएं समाज के सबसे संवेदनशील वर्गों से संबंधित हैं, इसलिए इन योजनाओं का प्रभावी और पारदर्शी क्रियान्वयन सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि पोषण आहार, महिला स्व-सहायता समूहों के सशक्तिकरण, आंगनबाड़ी सेवाओं तथा दिव्यांग कल्याण से जुड़ी योजनाओं को गंभीरता से लागू किया जाए, ताकि महिलाओं, बच्चों और दिव्यांगजनों को वास्तविक लाभ मिल सके।

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