खेतों में बिछी धान की फसल-पानी निकासी के लिए जूझ रहे किसान-पककर तैयार धान पर संकट/धूप नहीं मिलने से फसल की गुणवत्ता प्रभावित होने की आशंका
आरंग।अर्नव तूफान के असर से खेतों में बिछ चुकी धान की फसल को बचाने शुक्रवार सुबह से ही किसान अपने खेतों में उतरकर पानी निकासी की जद्दोजहद में जुटे रहे। खेतों में जमा पानी को बाहर निकालने के लिए किसान छोटी-छोटी नालियां बनाकर निकासी के रास्ते तैयार करते नजर आए। वहीं जिन खेतों में धान की खड़ी फसल पानी में डूबी हुई है, वहां भी पानी बाहर निकालने के लिए निकासी द्वार बनाए जा रहे हैं, ताकि जल्द से जल्द खेतों से जलभराव कम किया जा सके।लगातार बारिश और तेज हवाओं के चलते कहीं कटाई के लिए तैयार धान जमीन पर बिछ गया है तो कहीं लहलहाती खड़ी फसल पानी में डूबी हुई है। इससे किसानों के सामने दोहरी चुनौती खड़ी हो गई है। खेतों में फसल गिरने से धान की बालियां पानी और मिट्टी के संपर्क में आ रही हैं। वहीं जमीन पर बिछी फसल के कारण खेतों तक पर्याप्त धूप भी नहीं पहुंच पा रही है। धूप नहीं मिलने और लगातार नमी बने रहने से बालियों में दाने खराब होने, अंकुरण और फफूंदजनित बीमारियों का खतरा बढ़ गया है।किसानों की सबसे बड़ी चिंता कटाई के मुहाने पर खड़ी फसल को लेकर है। महीनों की मेहनत के बाद धान पककर तैयार हुआ है, लेकिन बारिश ने कटाई की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। खेतों में पानी भरे रहने से कटाई का काम भी अटक गया है। यदि जल्द मौसम साफ नहीं हुआ और खेतों से पानी नहीं निकला तो गिरी हुई फसल की बालियां सड़ने के साथ दानों की गुणवत्ता भी खराब हो सकती है।फिलहाल किसान अपने स्तर पर खेतों में छोटी-छोटी नालियां बनाकर पानी निकासी का रास्ता तैयार करने में लगे हैं। उनका प्रयास है कि खेतो में जमा पानी जल्द बाहर निकल जाए और फसल को कुछ राहत मिल सके। खाद, बीज, दवा ओर खेती किसानी में लगी लागत के बाद अच्छी पैदावार की उम्मीद लगाए किसानों को अब मौसम खुलने का इंतजार है।
विनोद गुप्ता-आरंग



