यहाँ मनाया गया मराठा साम्राज्य के संस्थापक छत्रपति शिवाजी महाराज की 396वी जयंती…

आरंग।अग्रसेन योगासन शाखा एवं लक्ष्मी नारायण मंदिर अग्रवाल पारा आरंग के संयुक्त प्रयास से आज विक्रम संवत 2082 , फाल्गुन मास , शुक्ल पक्ष द्वितीय तिथि हिन्दू साम्राज्य की कल्पना करने वाले छत्रपति शिवाजी महाराज की जयंती महोत्सव मनाई गई । अग्रसेन योगासन शाखा अपने नित्य दिनचर्या आसन , प्राणायाम , ध्यान योग एवं ध्वज प्रणाम के बाद मुख्य अतिथि महेश कुमार देवांगन नोटरी एवं कार्यक्रम के अध्यक्ष मनोज कुमार चन्द्राकर अध्यक्ष चंद्राकर समाज द्वारा शिवाजी महाराज एवं भारत माता की छाया चित्र पर पूजा अर्चना एवं दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम प्रारंभ किया गया । कार्यक्रम के मुख्य अतिथि महेश कुमार देवांगन ने अपने उद्बोधन में कहा कि शिवाजी महाराज पूरे भारत में मुगलों एवं अंग्रेजो के शासन से दुखी थे । उन्होंने अपने मित्रों एवं अपनी प्रजा के साथ मिलकर एक सेना तैयार कर मात्र 16 वर्ष की आयु में तोरणा किला जीत लिया । शिवाजी की वीरता एवं अदम्य साहस से आदिल शाह एवं औरंगजेब डरे हुए थे , मात्र 50 वर्ष की आयु में हनुमान जयंती के दिन चैत्र शुक्ल पक्ष पूर्णिमा को इस असार संसार से चले गए । भारत को हिन्दू राष्ट बनाने की उनकी कल्पना अधूरी रह गई । कार्यक्रम के अध्यक्ष मनोज कुमार चन्द्राकर ने कहा कि शिवाजी अनोखी युद्ध कला में पारंगत थे । गोरिल्ला युद्ध के जनक थे , इस युद्ध में तीन प्रकार के सैनिक होते थे ।शिवाजी को नेवी का जनक भी कहा जाता है । समुद्री तट पर नव सेना का निर्माण किया था । विनय पटेल ने कहा कि एक समय शिवाजी अपने गुरु राम दास के सामने कहने लगा कि सभी प्रजा का भरण पोषण मैं अच्छी तरह से कर रहा हूँ सामर्थ गुरु रामदास को आभास हुआ , शिवा के मन में अभिमान आ गया है , उन्होंने तुरंत शिवाजी को जंगल की ओर चलने के लिए कहा रास्ते में एक शीला आ गया , गुरु रामदास जी शिवाजी को उस पत्थर को हटाने के लिए कहा , शिवाजी ने कहा गुरुदेव यह शिला बहुत अंदर है , गुरु रामदास ने कहा यह रास्ते में रुकावट पैदा करता है ,इसे हटाओ गुरु की आज्ञा से सैनिकों द्वारा शिला खोद कर निकाला गया । उसके नीचे जल स्रोत था ,जिसमें एक मेंढ़क आराम से तैर रहा था । सामर्थ गुरु रामदास ने शिवा जी से कहा देखों इस मेंढ़क को । शिवाजी महाराज गुरु की बात से समझ गए और हाथ जोड़कर क्षमा मांगा । मैं तो एक माध्यम हूँ ,सब अपने – अपने भाग्य का ग्रहण करते है । इसलिए जीवन में घमंड नही करना चाहिए । अमिताभ अग्रवाल ने कहा कि एक समय बचपन में आदिल शाह के दरबार में शाह जी भोसले अपने पुत्र शिवा जी को प्रणाम करने के लिए कहा , शिवाजी प्रणाम नही किया , उन्होंने कहा ऐसे शासक जो निर्दयी, अत्याचारी एवं महिलाओं का सम्मान नही करता उनके सामने मैं अपना सिर नही झुकाउंगा और अपने पिता को प्रणाम कर चला गया । बचपन से ही निडर थे । मुरारी लोधी ने कहा कि शिवाजी महाराज को उनकी माता जीजाबाई से गीता एवं रामायण के माध्यम से ही संस्कारों की शिक्षा मिली थी ।उनके शब्द कोष में असंभव शब्द नही था । वे झुकते नही थे , रुकते नही थे , थकते नही थे एवं बिकते नही थे । इस अवसर पर , रविन्द्र अग्रवाल , अभिनेष अग्रवाल , ओम गुप्ता , शैलेष गुप्ता , शंकर पाल ,गोपाल पाल,बलराम साहू एवं रामकुमार कंसारी आदि उपस्थित थे । कार्यक्रम का संचालन अशोक कुमार ठाकुर एवं आभार व्यक्त बृजेश अग्रवाल द्वारा किया गया।
विनोद गुप्ता-आरंग

