बेजा कब्जा हटाने की कार्रवाई अधर में-सरपंच ने दोहराई 01 फरवरी को कलेक्टर घेराव की चेतावनी

आरंग। जनपद पंचायत आरंग अंतर्गत ग्राम पंचायत कुकरा में शासकीय भूमि से बेजा कब्जा हटाने को लेकर उठा मामला अब प्रशासनिक उलझनों और टालमटोल के चलते और अधिक गरमा गया है। ग्राम पंचायत कुकरा के सरपंच नंदलाल डहरिया के नेतृत्व में सरपंच सहित समस्त ग्रामवासियों ने ग्रेन व्यवस्था (सामूहिक सहमति) के तहत मंदिरहसौद तहसीलदार को चिन्हित 11 बेजा कब्जाधारियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग करते हुए संबंधित आवेदन सौंपा था।ग्रामीणों का कहना है कि आवेदन सौंपने के दौरान तहसीलदार ने यह कहते हुए ग्रामीणों को असमंजस में डाल दिया कि गांव से 13 अन्य बेजा कब्जाधारियों के विरुद्ध भी शिकायतें प्राप्त हुई हैं। इससे जहां पहले से चिन्हित मामलों पर सीधी कार्रवाई होनी थी, वहीं नए मामलों को जोड़कर विषय को उलझा दिया गया।इसके बावजूद बाद में पंचायत भवन में आयोजित बैठक में 11 बेजा कब्जाधारियों एवं तहसील कार्यालय में दर्ज 13 अन्य बेजा कब्जाधारियों के मामलों पर चर्चा कर सहमति बनते हुए संयुक्त कार्रवाई प्रारंभ करने का निर्णय लिया गया। बैठक के बाद राजस्व अमला ग्राम कुकरा के रीवा रोड स्थित बेजा कब्जा क्षेत्र में पहुंचा, जहां संयुक्त रूप से भूमि को समतल कर बेजा कब्जा हटाने की कार्रवाई भी की गई।कार्रवाई के दौरान जब अमला एक अन्य बेजा कब्जाधारी के बाउंड्री स्थल पर पहुंचा, तो वहां संबंधित ग्रामीण आवेदक की अनुपस्थिति का हवाला दिया गया। इसी बिंदु पर सरपंच द्वारा यह कहे जाने पर कि आवेदक की अनुपस्थिति में भी पूर्व सहमति के अनुसार कार्रवाई की जाए, सरपंच और तहसीलदार के बीच तीखा वाद-विवाद हो गया।बताया गया कि इसके बाद तहसीलदार ने अपने उच्चाधिकारियों से चर्चा का हवाला देते हुए उक्त बेजा कब्जा पर कार्यवाही करने की बात कही जिसे सरपंच ने तहसीलदार के ढुलमुल बातो पर नाराजी जताते हुए तहसीलदार की बातों पर असमर्थता जताते हुए नाराजगी व्यक्त की जिससे तहसीलदार बिना किसी स्पष्ट आश्वासन के मौके से रवाना हो गए। तहसीलदार के इस रवैये से न केवल सरपंच बल्कि समस्त ग्रामवासियों में गहरी नाराजगी व्याप्त हो गई।ग्रामीणों और ग्राम पंचायत के सभी पंचों के एकतरफा समर्थन और पूर्ण सहयोग के बावजूद कार्रवाई को बीच में ही स्थगित कर दिया गया, जिससे ग्रामीणों ने ग्रेन व्यवस्था और सामूहिक निर्णय की सार्थकता पर सवाल खड़े किए। ग्रामीणों का कहना है कि जब पूरे गांव की सहमति और प्रशासनिक सहमति के बाद भी कार्रवाई रोकी जाती है, तो फिर ग्राम व्यवस्था का कोई औचित्य नहीं रह जाता।इस पर सरपंच नंदलाल डहरिया ने दो टूक शब्दों में कहा कि यदि 1 फरवरी तक बेजा कब्जा नहीं हटाया गया, तो ग्राम पंचायत एवं समस्त ग्रामीणों के साथ मिलकर कलेक्टर कार्यालय का घेराव किया जाएगा। सरपंच की इस चेतावनी का ग्रामवासियों ने खुलकर समर्थन किया।
सरपंच ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि जहां अधिकांश स्थानों पर सार्वजनिक बेजा कब्जा हटाने में जनता बाधा बनती है, वहीं कुकरा जैसे आदर्श गांव में ग्रामीणों और सभी पंचों का पूर्ण सहयोग होने के बावजूद कार्रवाई को स्थगित करना समझ से परे है।मामले को लेकर ग्राम कुकरा में प्रशासनिक कार्यप्रणाली के प्रति असंतोष और आक्रोश का माहौल बना हुआ है।
विनोद गुप्ता-आरंग






