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द्वि-दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी-रीवा उत्खनन से छत्तीसगढ़ के प्राचीन इतिहास को नई दिशा–राजेश अग्रवाल

द्वि-दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी-रीवा उत्खनन से छत्तीसगढ़ के प्राचीन इतिहास को नई दिशा–राजेश अग्रवाल

आरंग।जनपद पंचायत आरंग के अंतर्गत लोरिक नगर गढ़ के नाम से प्रख्यात रीवा गढ़ उत्खनन स्थल पर आयोजित छत्तीसगढ़ के प्राचीन सिक्के एवं मुद्रा प्रणाली विषयक पर द्वि-दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का शनिवार को समारोह का समापन हुए। मुख्य अतिथि राजेश अग्रवाल संस्कृति मंत्री छत्तीसगढ़ रहे। संगोष्ठी में देशभर से पधारे विद्वानों, शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि रीवा उत्खनन के परिणाम अत्यंत उत्साह जनक और ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं।संस्कृति मंत्री अग्रवाल ने आगे कहा कि रीवा उत्खनन में आहत सिक्कों से लेकर कल्चुरी कालीन सिक्कों तक की अविच्छिन्न श्रृंखला प्राप्त हुई है, जो इस क्षेत्र की ऐतिहासिक निरंतरता को सशक्त रूप से प्रमाणित करती है। यह खोज छत्तीसगढ़ की प्राचीन मुद्रा प्रणाली और आर्थिक इतिहास को समझने में एक महत्वपूर्ण कड़ी सिद्ध होगी।उन्होंने बताया कि हालिया उत्खनन में प्राप्त लौह प्रगलन केंद्र तथा रेडियोकार्बन तिथि निर्धारण के आधार पर रीवा की प्राचीनता 9वीं सदी ईसा पूर्व (उत्तर वैदिक काल) तक निर्धारित की गई है। यह उपलब्धि छत्तीसगढ़ के प्राचीन इतिहास, तकनीकी ज्ञान और धातुकर्म परंपरा की समृद्ध विरासत को उजागर करती है।संगोष्ठी में छत्तीसगढ़ सहित देश के विभिन्न हिस्सों से आए विषय विशेषज्ञों ने अपने शोध पत्र प्रस्तुत किए। प्रमुख रूप से आचार्य रमेंद्र नाथ मिश्र, श्री जी.एल. रायकवार, मुद्राशास्त्री डॉ. जी.एस. ख्वाजा (नागपुर), प्रो. सुष्मिता बसु मजूमदार (कोलकाता), प्रो. आलोक श्रोतरीय (अमरकंटक), डॉ. देवेन्द्र कुमार सिंह, डॉ. विशि उपाध्याय (पटना) तथा डॉ. राजीव मिंज की गरिमामयी उपस्थिति रही।कार्यक्रम में पुरातत्त्व संचालनालय के अधिकारी-कर्मचारी, न्यूमिस्मेटिक एंड फिलेटली सोसाइटी ऑफ छत्तीसगढ़ के पदाधिकारी कमल बैद, रीवा के सरपंच घसिया राम साहू सहित अन्य जनप्रतिनिधि भी उपस्थित रहे। अतिथियों का स्वागत डॉ. पी.सी. पारख, उप संचालक द्वारा किया गया तथा कार्यक्रम का संचालन प्रभात कुमार सिंह, पुरातत्ववेत्ता ने किया।इस अवसर पर संगोष्ठी की स्मारिका पुस्तिका का विमोचन भी किया गया। संगोष्ठी के अंतर्गत विद्वानों एवं अध्येताओं ने रीवा उत्खनन स्थल का प्रत्यक्ष अवलोकन कर वहां प्राप्त पुरावशेषों का अध्ययन किया। शोध परिभ्रमण में डॉ. वृषोत्तम साहू, प्रवीण तिर्की एवं अमर भरतद्वाज का विशेष सहयोग रहा।संगोष्ठी का समापन शैक्षणिक विमर्श, शोध निष्कर्षों तथा छत्तीसगढ़ के प्राचीन इतिहास पर भावी अनुसंधान की संभावनाओं पर सार्थक संवाद के साथ हुआ। विशेषज्ञों ने रीवा उत्खनन को राज्य के पुरातात्विक अध्ययन के लिए एक मील का पत्थर बताया।
विनोद गुप्ता-आरंग

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