Blog

धर्म-शिव महापुराण कथा सत्संग का तीसरा दिन-शिव भक्ति का पथ जितना सरल है, उतना ही गूढ़ और रहस्यमय भी है-पं.प्रेमकिशोर

धर्म-शिव महापुराण कथा सत्संग का तीसरा दिन-शिव भक्ति का पथ जितना सरल है, उतना ही गूढ़ और रहस्यमय भी है-पं.प्रेमकिशोर

आरंग।रामलीला चौक तूता नया रायपुर में जय माँ शीतला (शाकम्भरी) जस झांकी परिवार, ग्रामवासी एवं मानस मंडली तूता के संयुक्त तत्वाधान में शुक्रवार से प्रारम्भ शिवमहापुराण कथा सत्संग के तीसरे दिन कथा व्यास पं. प्रेमकिशोर शर्मा ने रुद्राक्ष महिमा विल्बपत्र व नारद मोह कथा का श्रवण कराते हुए कहा कि शिव भक्ति का पथ जितना सरल है, उतना ही गूढ़ और रहस्यमय भी। शिव कृपा पाने के लिए न तो आडंबर की आवश्यकता है और न ही कठिन साधनाओं की यदि आवश्यकता है तो सच्ची श्रद्धा और निष्कपट भाव की। यही संदेश रुद्राक्ष महिमा, बिल्व पत्र की महत्ता और नारद मोह की प्रेरक कथा में निहित है, जिसका भावपूर्ण वर्णन कथा व्यास पं. प्रेमकिशोर ने किया।कथा व्यास ने बताया कि रुद्राक्ष केवल एक बीज नहीं, बल्कि स्वयं भगवान शिव के अश्रु से उत्पन्न दिव्य वरदान है। शास्त्रों के अनुसार जब संसार के कल्याण के लिए भगवान शिव ने ध्यान में नेत्र खोले, तब उनके करुणामय अश्रु धरती पर गिरे और उनसे रुद्राक्ष का जन्म हुआ। रुद्राक्ष धारण करने से मानसिक शांति, रोगों से मुक्ति और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त होता है। सच्चे भाव से धारण किया गया रुद्राक्ष शिव कृपा का सजीव प्रतीक बन जाता है।इसके पश्चात कथा में बिल्व पत्र की महिमा का सुंदर वर्णन हुआ। पं. प्रेमकिशोर ने कहा कि भगवान शिव को बिल्व पत्र अत्यंत प्रिय है। त्रिदल वाला बिल्व पत्र त्रिगुण सत्व, रज और तम का प्रतीक है, जिसे अर्पित कर भक्त अपने अवगुणों का त्याग करता है। शास्त्रों में कहा गया है कि यदि कोई भक्त श्रद्धा से एक बिल्व पत्र भी शिवलिंग पर अर्पित करता है, तो उसे हजारों स्वर्ण दानों के दान का पुण्य प्राप्त होता है। बिल्व पत्र का स्पर्श मात्र भी पापों का क्षय कर देता है।कथा का अत्यंत रोचक और शिक्षाप्रद प्रसंग नारद मोह का रहा। देवर्षि नारद, जो स्वयं परम ज्ञानी और नारायण के अनन्य भक्त हैं, जब अहंकारवश अपनी भक्ति पर गर्व करने लगे, तब भगवान विष्णु ने उन्हें माया का अनुभव कराने हेतु मोह में डाला। नारद जी सांसारिक आकर्षण में बंधकर अपने वास्तविक स्वरूप को भूल बैठे। समय बीतने पर जब मोह भंग हुआ, तब उन्हें यह बोध हुआ कि अहंकार ही सबसे बड़ा बंधन है। इस कथा के माध्यम से पं. प्रेमकिशोर ने बताया कि ज्ञान और भक्ति के साथ विनम्रता अनिवार्य है, अन्यथा श्रेष्ठ से श्रेष्ठ साधक भी मोह में पड़ सकता है।कथा व्यास ने अंत में कहा कि रुद्राक्ष, बिल्व पत्र और नारद मोह तीनों ही हमें एक ही संदेश देते हैं कि भक्ति में भाव सर्वोपरि है। जब मन निर्मल, भाव शुद्ध और अहंकार शून्य हो, तब भगवान शिव स्वयं भक्त के हृदय में वास करते हैं।कथा स्थल पर भारत पटेल शत्रुहण पटेल एवन कुमार पटेल,कोमल पटेल, अजय पटेल दिनेश्वर बैस हरिशंकर बैस सहित बड़ी संख्या में उपस्थित श्रद्धालुओ ने आध्यात्मिक रसधारा में भावविभोर हो उठे और हर हर महादेव के जयघोष से वातावरण शिवमय हो गया।
विनोद गुप्ता-आरंग

Related Articles

Back to top button