श्रीमद भागवत कथा ज्ञान यज्ञ सप्ताह-गृहस्थों के इन सात सूत्र का किया वर्णन….

आरंग। आरंग के ब्राम्हण पारा में राजपुरोहित बाड़ा में चल रहे श्रीमद भागवत कथा ज्ञान यज्ञ सप्ताह में व्यास गद्दी से भागवत कथा का वाचन करते हुए पंडित ध्रुव नारायण शुक्ल ने भागवत महापुराण के अंतर्गत गृहस्थों के सात सूत्र का वर्णन किया जो बहुत ही मार्मिक रहा और लोगों ने एकाग्र होकर कथा का श्रवण किया, लंबे समय तक बैठकर कथा में वह भाव विभोर हो गए।उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत महापुराण कथा में जीवन को पवित्र रखना है तो गृहस्थ भी कुछ नियम है गृहस्थी के साथ सूत्र ग्रंथ में बताया गया है संयम संतुष्टि संतान संवेदनशीलता संकल्प सक्षम और समर्पण इसको जो व्यक्ति नियम से कार्य करते हैं तो निश्चित रूप से उनको सफलता मिलती है और भगवान की कृपा से उनका घर हस्त वातावरण सुख में हो जाता है संयम जीवन के केंद्र में परमात्मा का होना चाहिए परिधि पर संसार रखिए हम उल्टा करते हैं इसलिए शांत हो जाते हैं यदि पति-पत्नी संयम होते हैं तो इसका सीधा असर आपसी रिश्तों पर संतान पर पारिवारिक सामाजिक और व्यावसायिक संबंधों पर भी पड़ता है इसलिए पति-पत्नी का संयमित होना बहुत आवश्यक है संयम रुपया एक सूत्र है उनके पूरे जीवन का स्वर सकता है दूसरा संतुष्टि संतोष गृहस्थी का रहना है सज्जनों परिवार में सदस्य एक दूसरे से जितने संतुष्ट रहेंगे परिवार उतना ईश्वर का सुख देगा स्वर्ग और नाटक सीधा सा अर्थ है हमारा शांत होना ही स्वर्ग है और हमारा शांत रहना ही नरक है तीसरा संतान समिति और सुरुचि से पाली जाए तो ध्रुव की तरह श्रेष्ठ बनेगी यदि रुचि से पाली जाए तो उत्तम किताब बर्बाद हो जाएगी इसलिए लालन-पालन में संतान और माता-पिता दोनों ही अपनी अपनी रुचि पर नियंत्रण रखें और नीति पूरक कार्यकारी दौर में परिवार के सदस्यों के बीच अचानक लेन देन जैसा व्यवहार आ गया गृहस्थी में जितनी समस्या चल रही है उनमें से एक बड़ी समस्या है इमोशनल ऑप्शन परिवार में संविधान परिवार में संवेदनाएं चली जाए तो रिश्ते बोझ बन जाते हैं फिर लोग उन्हें निभाने नहीं आगे है संकल्प संकल्प में हम राजा पृथ्वी से पृथ्वी को तरस था जीवन सभी को जन्म के साथ एक जैसा मिलता है इसे तरसना पड़ता है जैसे मूर्तिकार पत्थर में से मूर्ति का रास्ता है मूर्तिकार को पत्थर में आकृति पहले ही दिख जाती है हमें नहीं दिखती जब उसे और बना होते हैं तो वह सीधे वोट नहीं बनता पहले वोट के आस-पास का पत्थर हटता है तब वोट अपने आप बाहर निकल जाते हैं इसी तरह हम जीवन में जो व्यस्त की बातें हैं उन्हें हटा ले और सार्थक बातें को कर रखें इसलिए एक व्यक्ति को यह मालूम होना चाहिए कि क्या नहीं करना है यदि हम इसकी जानकारी सही रखे तो क्या करना है यह हमें सफलता से समझ में आ जाएगा सक्षम गृहस्थी में सक्षम होने का अर्थ है तन मन और धन से सक्षम होना कुछ लोग तन से सक्षम होते हैं धन और मन से कमजोर होते हैं कुछ ढंग से सक्षम होते हैं तो तन और मन से कमजोर हो जाते हैं कृष्ण भगवान कहते हैं गृहस्त्व को इन तीनों में सक्षम होना चाहिए अंतिम में समर्पण दृष्टि में अकेलापन भी एक बीमारी बन गया है हमारे घर में किसी सदस्य को छत में घर के छठ के नीचे अकेलापन ना लगे अकेलापन हम दूसरों से मिटाते हैं एकांत में हम परमात्मा से जोड़ते हैं अकेलेपन को एकांत में बदलने की कला का नाम भागवत है गृहस्ती समझौते से नहीं समर्पण से चलता है समर्पण की अगली पायदान पर प्रेम का जन्म हो जाता है परिवार का आदर प्रेम होना चाहिए श्री कृष्ण की दृष्टि इसी का उदाहरण है।
विनोद गुप्ता-आरंग



