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    Home»Blog»बड़ी खबर-स्वामी आत्मानंद स्कुल के प्राचार्यो को एकल शिक्षकीय विद्यालयों में भेजने की प्रक्रिया से प्राचार्यो में नाराजगी-कोर्ट जाने की तैयारी….
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    बड़ी खबर-स्वामी आत्मानंद स्कुल के प्राचार्यो को एकल शिक्षकीय विद्यालयों में भेजने की प्रक्रिया से प्राचार्यो में नाराजगी-कोर्ट जाने की तैयारी….

    Vinod GuptaBy Vinod GuptaNovember 20, 2025
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    बड़ी खबर-स्वामी आत्मानंद स्कुल के प्राचार्यो को एकल शिक्षकीय विद्यालयों में भेजने की प्रक्रिया से प्राचार्यो में नाराजगी-कोर्ट जाने की तैयारी….

    आरंग।शासन द्वारा स्वामी आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम विद्यालयों के प्राचार्यों के संबंध में जारी नवीन आदेश ने व्यापक असंतोष पैदा कर दिया है। आदेश के अनुसार इन प्राचार्यों को अचानक एकल शिक्षकीय विद्यालयों में भेजने की प्रक्रिया शुरू की गई है, जिसे प्राचार्यों ने पूर्णतः अनुचित, अनैतिक तथा पद की गरिमा के विरुद्ध बताया है।प्राचार्यों का कहना है कि शासन के कुछ अधिकारियों ने पहले उन्हें गुमराह किया और आश्वासन दिया कि स्वामी आत्मानंद विद्यालयों में रिक्त पद शीघ्र भरे जाएंगे तथा वर्तमान प्राचार्यों को यथावत रखा जाएगा। लेकिन इसके विपरीत शासन ने अचानक आदेश पारित कर दिया कि इन प्राचार्यों को एकल शिक्षक विद्यालयों में स्थानांतरित किया जाए—यह निर्णय न केवल अनुचित है बल्कि चयन प्रक्रिया और पद की गरिमा के विपरीत बताया है।प्राचार्यों ने कहा कि जब इन्हें साक्षात्कार की कठोर प्रक्रिय के बाद नियुक्त किया गया था, तो बीच सत्र में इन्हें हटाने की क्या बाध्यता उत्पन्न हो गई? यदि किसी प्राचार्य को बदला जाना है, तो नए नियुक्त होने वाले प्राचार्य का भी समान रूप से अंग्रेजी माध्यम के अनुरूप साक्षात्कार किया जाए, उनकी सहमति ली जाए और प्रतिनियुक्ति संबंधी नियमों का पालन किया जाए। तभी न्याय, पारदर्शिता और पद की गरिमा बनी रह सकती है। प्राचार्यों ने यह भी कहा कि शासन शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने की बात करता है, जबकि इन्हीं प्राचार्यों ने 100% परिणाम देकर अपने कार्यकुशलता और क्षमता को सिद्ध किया है। इसके बावजूद बीच सत्र में इन्हें हटाने का निर्णय अन्यायपूर्ण है।प्राचार्यों ने स्पष्ट संदेश दिया है कि यदि उनकी उपेक्षा की गई और न्याय न मिला तो वे सड़क से लेकर कोर्ट तक लड़ाई लड़ने के लिए तैयार हैं।अचानक अंग्रेजी माध्यम विद्यालयों के प्राचार्यों को हटाए जाने का मुद्दा वर्तमान समय में अभिभावकों और क्षेत्रवासियों के बीच अत्यंत चर्चित विषय बन गया है। सभी के मन में यही प्रश्न उठ रहा है कि उत्कृष्ट परिणाम देने वाले प्राचार्यों को बीच सत्र में हटाने की आवश्यकता क्यों पड़ रही है।
    सूत्रों के अनुसार यह विवाद इसलिए बढ़ रहा है क्योंकि कुछ नव–पदोन्नत प्राचार्य चाहते हैं कि उन्हें अपने नजदीकी क्षेत्र में पदस्थापना मिले और वे स्वामी आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम विद्यालयों में अपनी नियुक्ति करवा लें। बताया जा रहा है कि कुछ व्यक्तियों द्वारा योजनाबद्ध तरीके से, अधिकारियों पर प्रभाव डालकर, यहां तक कि आर्थिक प्रलोभन देकर अंग्रेजी माध्यम विद्यालयों में पद प्राप्त करने का प्रयास किया जा रहा है।
    जबकि यह अच्छी तरह ज्ञात है कि स्वामी आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम विद्यालयों का संचालन एक समिति के माध्यम से होता है, जिसके अध्यक्ष जिला कलेक्टर होते हैं। इसके बावजूद उच्च स्तर के कुछ अधिकारी और राजनीतिक प्रभाव वाले लोग नए प्राचार्यों को अंग्रेजी माध्यम विद्यालय में लाने का प्रयास कर रहे हैं, चाहे उन व्यक्तियों को अंग्रेजी माध्यम का अनुभव या अंग्रेजी भाषा का पर्याप्त ज्ञान न हो।यह भी चर्चाओं में है कि इस प्रक्रिया में पैसे एवं रुपये तक लेनदेन जैसी अनैतिक गतिविधियाँ भी होने की संभावना जताई जा रही है, जो पूरे तंत्र पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।यदि शासन सच-मुच शिक्षा की गुणवत्ता को प्राथमिकता देना चाहता है, तो उसे उन प्राचार्यों के कार्यों का सम्मान करना चाहिए जिन्होंने उत्कृष्ट कार्य करते हुए 100% परिणाम दिए हैं। ऐसे सक्षम एवं ईमानदार प्राचार्यों को अचानक, वह भी मध्य–सत्र में हटाया जाना न केवल अभिभावकों और पालकों में असंतोष पैदा करेगा बल्कि विद्यार्थियों पर भी नकारात्मक प्रभाव डालेगा। समाज में भी यह संदेश जाएगा कि अच्छा काम करने वालों को ही दंडित किया जा रहा है। इससे शासन-प्रशासन को भी अनावश्यक कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा।इसी कारण सभी प्राचार्यों ने शिक्षा मंत्री से मुलाकात कर अपनी बात स्पष्ट रूप से रखी है। उन्होंने कहा है कि यदि उनकी उचित मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया, तो वे न्याय की लड़ाई कोर्ट तक ले जाने के लिए बाध्य होंगे। प्राचार्यों ने मंत्रियों से भी मिलने का समय निकाला है। यह भी सभी जानते हैं—विद्यार्थी, पालक और अभिभावक—कि संबंधित प्राचार्य प्रतिदिन शाम 6:00 से 7:00 बजे तक विद्यालय को समय देकर निरंतर उत्कृष्ट कार्य कर रहे थे।यदि ऐसे निष्ठावान प्राचार्यों को बिना पूर्व सूचना, अचानक हटाया जाता है, तो यह उनके मान-सम्मान और पद की गरिमा पर सीधी चोट होगी। यह निर्णय शिक्षा की गुणवत्ता को ध्यान में रखकर नहीं लिया गया प्रतीत होता। इसलिए शासन से विनम्र निवेदन है कि इस पूरे प्रकरण पर गंभीरता से ध्यान दें और न्यायसंगत निर्णय लें।
    विनोद गुप्ता-आरंग

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