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बसंत पंचमी-कला, संगीत एवं विद्या की जननी मां सरस्वती की प्रकटोत्सव मनाया गया

बसंत पंचमी-कला, संगीत एवं विद्या की जननी मां सरस्वती की प्रकटोत्सव मनाया गया

आरंग।अग्रसेन योगासन शाखा एवं लक्ष्मी नारायण मंदिर अग्रवाल पारा आरंग के संयुक्त प्रयास से आज विक्रम संवत 2082 , माघ मास , शुक्ल पक्ष पंचमी तिथि को कला ,संगीत एवं विद्या की जननी माता सरस्वती की प्रकटोत्सव मनाया गया। अग्रसेन योगासन शाखा अपने नित्य दिनचर्या आसन , प्राणायाम ,ध्यान योग एवं ध्वज प्रणाम के बाद मुख्य अतिथि बद्री विशाल गुप्ता एवं कार्यक्रम के अध्यक्ष सनद कुमार कंसारी द्वारा वीणा वादनी मां सरस्वती , डॉ. केशव बलीराम हेडगेवार , एवं गुरुजी सदाशिव गोलवलकर की छाया चित्र पर पूजा अर्चना एवं दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम प्रारंभ किया गया । कार्यक्रम के मुख्य अतिथि बद्री विशाल गुप्ता जी द्वारा अपने उद्बोधन में कहा कि माता सरस्वती आज ही के दिन प्रकट हुई है , बसंत पंचमी को ऋतुओं का राजा कहा जाता है इसके आगमन से समस्त प्राणियों में नव चेतना प्राप्त होता है। सनद कुमार कंसारी ने कहा वाग्वादिनी मां सरस्वती के मुख से ब्रम्हांड से पहला शब्द ॐ निकला । जिससे प्रकृति के समस्त चीजों में स्वर निकला नदियाँ कलरव करने लगी ,पक्षी चहचहाने लगी ,हवा सरसराने लगी ,मानव अपनी संवाद एक दूसरे तक पहुँचाया ।जो सृष्टि नीरस थी वह अब सरस् , रसमय हो गई। दीपक साहेब गुरुगोश्वमि ने कहा कि माता सरस्वती के चार भुजाओं में चार चीजें हैं । पहली भुजा में वीणा, वीणा कला एवं संगीत का प्रतीक है। कला एवं संगीत उदास व्यक्ति को भी प्रसन्न कर देती है । दूसरी भुजा में पुस्तक, पुस्तक ज्ञान विद्या का प्रतीक है । जीवन में शिक्षा से बढ़ कर दूसरा कुछ नहीं है ज्ञान सुखमय जीवन के लिए प्रेरित करता है , अज्ञानता के कारण व्यक्ति दुखी है । तीसरी भुजा में माला,माला ध्यान एवं एकाग्रता का प्रतीक है , ध्यान से जीवन में शुद्धता एवं शांति आती है , मन विकारों की ओर नही जाता । चौथी भुजा में कमल पुष्प, यह पवित्रता का प्रतीक है , कमल कीचड़ में उत्पन्न होकर जल से भी निर्लिप्त रहती है , हम मानव को भी माया में रह कर माया से अलग रहने का प्रयास करना चाहिए । शंकर पाल ने कहा कि हम लोगों को भी संसार की अच्छी चीजों को ग्रहण करना चाहिए । माता सरस्वती की सवारी हंस है , हंस दूध एवं पानी में दूध को ग्रहण करती है पानी को नही इसी प्रकार हमें भी अपने जीवन में सार-सार को अपनाना चाहिए जिससे जीवन सरस् , आनंदमय , शांतिमय एवं प्रेममय हो। इस अवसर पर , रविन्द्र अग्रवाल, अमिताभ अग्रवाल, अभिनेष अग्रवाल , ओम गुप्ता, कमता पाल एवं रामकुमार कंसारी आदि उपस्थित थे । कार्यक्रम का संचालन अशोक कुमार ठाकुर एवं आभार व्यक्त बृजेश अग्रवाल द्वारा किया गया।
विनोद गुप्ता-आरंग

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