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नटखट कान्हा की बाल लीलाओं में डूबे भक्त-गोवर्धन पूजा के माध्यम से दिया कर्मयोग का संदेश

नटखट कान्हा की बाल लीलाओं में डूबे भक्त-गोवर्धन पूजा के माध्यम से दिया कर्मयोग का संदेश

आरंग। विवेकानन्द आश्रम लखौली में चल रही श्रीमद्भागवत महापुराण यज्ञ कथा के अंतर्गत रविवार को कथा व्यास आचार्य पं. श्री नवीन कृष्ण महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं, माखन चोरी और गोवर्धन पूजा प्रसंग का भावपूर्ण व रसपूर्ण वर्णन किया। कथा के दौरान पूरा पांडाल भक्ति, आनंद और उल्लास से सराबोर हो उठा।कथा व्यास ने श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का वर्णन करते हुए कहा कि बालकृष्ण की हर लीला में लोककल्याण और प्रेम का संदेश छिपा है। माखन चोरी प्रसंग में उन्होंने बताया कि कृष्ण का माखन चुराना केवल लीला नहीं, बल्कि भक्तों के हृदय में छिपे प्रेम और अहंकार को चुराने का प्रतीक है। जैसे ही कथा में नटखट कान्हा का प्रसंग आया, श्रद्धालुओं के मुख से “नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की” के जयघोष गूंज उठे।गोवर्धन पूजा प्रसंग में आचार्य पं. श्री नवीन कृष्ण महाराज ने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण ने इंद्र के अभिमान को तोड़कर ब्रजवासियों को प्रकृति पूजा का संदेश दिया। गोवर्धन पर्वत उठाकर उन्होंने यह सिखाया कि सच्ची भक्ति दिखावे में नहीं, बल्कि कर्म, सेवा और विश्वास में होती है। यह प्रसंग आत्मनिर्भरता और प्रकृति संरक्षण की प्रेरणा देता है।कथा के दौरान बाल गोपाल की लीलाओं पर आधारित भजनों और कीर्तनों ने वातावरण को और अधिक भक्तिमय बना दिया। श्रद्धालु भावविभोर होकर नृत्य करने लगे और पूरा आश्रम परिसर कृष्णमय हो गया।कथा व्यास ने अपने संदेश में कहा कि यदि जीवन में कृष्ण की बाल लीलाओं की सरलता, माखन चोरी की निश्छलता और गोवर्धन पूजा का कर्मयोग उतार लिया जाए, तो मानव जीवन धन्य हो जाता है।अंत में आरती व प्रसाद वितरण के साथ रविवार की कथा का विश्राम श्रद्धा और उल्लास के वातावरण में हुआ।
विनोद गुप्ता-आरंग

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