खास खबर-अपना घर आश्रम–लावारिस और लाचारों के लिए उम्मीद की रोशनी

आरंग। आरंग विकासखण्ड के ग्राम गोढ़ी में संचालित अपना घर आश्रम आज केवल एक आश्रय स्थल नहीं, बल्कि मानवता, करुणा और पुनर्वास का जीवंत केंद्र बन चुका है। यह आश्रम उन लोगों के लिए संबल है, जो परिस्थितियों के चलते समाज की मुख्यधारा से कट गए हैं। वर्तमान में यहां 18 वर्ष से अधिक आयु के मंदबुद्धि, लावारिस एवं लाचार 114 से अधिक प्रभुजी सुरक्षित और सम्मानपूर्ण जीवन जी रहे हैं।आश्रम में निवासरत प्रभुजनों के लिए भोजन, वस्त्र, स्वच्छ आवास, स्वास्थ्य सेवाएं और दैनिक आवश्यकताओं की समुचित व्यवस्था की गई है। सुव्यवस्थित दिनचर्या के तहत उनकी हर जरूरत का ध्यान रखा जाता है। सेवाभावी कर्मचारी और स्वयंसेवक यहां परिवार जैसा माहौल बनाते हैं, जिससे आश्रितों को अपनापन और सुरक्षा का अनुभव होता है।मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य के लिए नियमित चिकित्सकीय जांच, दवाइयों की व्यवस्था तथा आवश्यकता पड़ने पर अस्पताल में उपचार की सुविधा उपलब्ध है। इसके साथ ही योग, भजन-कीर्तन, सत्संग और संवाद जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से मानसिक संतुलन और भावनात्मक मजबूती पर विशेष ध्यान दिया जाता है।

अपना घर आश्रम की सबसे बड़ी विशेषता उपचार के साथ पुनर्वास है। यहां लाए गए प्रभुजनों की काउंसिलिंग कर उनकी पहचान और पते का पता लगाया जाता है। स्वस्थ होने पर परिजनों से संपर्क कर काउंसिलिंग के बाद उन्हें सुरक्षित रूप से घर पहुंचाया जाता है। अब तक आश्रम द्वारा 394 प्रभुजनों का रेस्क्यू किया जा चुका है, जिनमें से 228 का सफल पुनर्वास उनके परिवारों में किया गया है।आश्रम में दीपावली, होली, छेरछेरा और नववर्ष जैसे पर्व सामूहिक रूप से मनाए जाते हैं। इन आयोजनों से प्रभुजनों के जीवन में उल्लास और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। समाजसेवी संगठन, जनप्रतिनिधि और स्थानीय नागरिक भी समय-समय पर सेवा कार्यों में भागीदारी निभाते हैं।ग्रामीण क्षेत्र में स्थित होने के बावजूद गोढ़ी का अपना घर आश्रम यह संदेश देता है कि सेवा और संवेदना के लिए बड़े संसाधनों की नहीं, बल्कि बड़े हृदय की आवश्यकता होती है। यह आश्रम साबित कर रहा है कि सही मार्गदर्शन और सहयोग से हर व्यक्ति को सम्मानपूर्ण जीवन दिया जा सकता है।

संस्थापक गोपाल प्रसाद अग्रवाल ने नवभारत से चर्चा में बताया कि आश्रम की स्थापना मार्च 2023 में हुई। इसकी प्रेरणा सड़कों, रेलवे स्टेशनों और बस अड्डों पर भटकते असहाय लोगों की पीड़ा को करीब से देखने से मिली। उन्होंने कहा कि कई बार मानसिक असंतुलन या बीमारी के कारण लोग अपने परिवार से बिछुड़ जाते हैं और लावारिस बन जाते हैं। ऐसे में केवल दया नहीं, बल्कि स्थायी समाधान जरूरी था।इसी सोच से ऐसा केंद्र स्थापित किया गया, जहां उपचार, संरक्षण और पुनर्वास तीनों एक साथ संभव हो सकें। श्री अग्रवाल के अनुसार, आश्रम मानवता और सामूहिक जिम्मेदारी का प्रतीक है। उनका मानना है कि यदि समाज और शासन मिलकर प्रयास करें, तो कोई भी व्यक्ति बेसहारा नहीं रहेगा।अपना घर आश्रम प्रशासन ने शासकीय विभागों, पुलिस, नगर निगम, समाज कल्याण और स्वास्थ्य विभाग से अपील की है कि यदि कहीं भी कोई निराश्रित या असहाय व्यक्ति मिले, तो तत्काल आश्रम से संपर्क किया जाए। इससे समय पर रेस्क्यू कर उन्हें सुरक्षित जीवन दिया जा सकेगा। गोढ़ी का अपना घर आश्रम आज सचमुच उन लोगों के लिए “अपना घर” बन चुका है, जिनके पास कभी कोई ठिकाना नहीं था। यह संस्थान समाज के लिए प्रेरणा है और यह सिद्ध करता है कि एक संवेदनशील विचार भी बड़ा सामाजिक परिवर्तन ला सकता है।
विनोद गुप्ता-आरंग


