अहंकार का त्याग और सत्य की स्वीकृति ही मोक्ष का मार्ग बनती है–प.प्रेमकिशोर शर्मा

आरंग। रामलीला चौक तूता नया रायपुर में जय माँ शीतला (शाकम्भरी) जस झांकी परिवार, ग्रामवासी एवं मानस मंडली तूता के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित शिवमहापुराण कथा सत्संग के दूसरे दिन कथा स्थल पर श्रद्धा, जिज्ञासा और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। जैसे ही कथा व्यास पं.प्रेमकिशोर शर्मा ने आदि शिवलिंग की उत्पत्ति का प्रसंग छेड़ा, पूरा पंडाल मानो ध्यान में स्थिर हो गया। श्रोताओं की निगाहें मंच पर और मन शिव तत्व में लीन हो गए।कथा व्यास ने भावपूर्ण शैली में बताया कि एक समय ब्रह्मा और विष्णु के मध्य श्रेष्ठता का भाव उत्पन्न हुआ। उसी क्षण आकाश से पाताल तक फैला एक दिव्य अग्निस्तंभ प्रकट हुआ न उसका आरंभ दिखा, न अंत। सत्य की खोज में ब्रह्मा हंस रूप धारण कर ऊपर की ओर बढ़े, तो विष्णु वराह बनकर पाताल की गहराइयों में उतर गए, किंतु दोनों ही अनंत के छोर को नहीं पा सके।अंततः अहंकार का विसर्जन हुआ और दोनों देवों ने स्वीकार किया कि वही अग्निस्तंभ परम सत्य, अनंत और निराकार भगवान शिव हैं। कथा व्यास ने बताया कि यही दिव्य अग्निस्तंभ आगे चलकर शिवलिंग के रूप में प्रतिष्ठित हुआ, जो सृष्टि की उत्पत्ति, पालन और संहार का प्रतीक है।पं. शर्मा ने श्रोताओं को संदेश दिया कि शिवलिंग केवल पूजा का प्रतीक नहीं, बल्कि जीवन का दर्शन है जहाँ अहंकार का त्याग और सत्य की स्वीकृति ही मोक्ष का मार्ग बनती है। प्रवचन के दौरान “ॐ नमः शिवाय” के गूंजते जयघोष से वातावरण शिवमय हो उठा और श्रोता भावविभोर होकर भक्ति रस में डूबते चले गए।
विनोद गुप्ता-आरंग

